शिव महापुराण के साथ ‘प्रकृति’ की सेवा: नारी शक्ति महिला मंडल बांटेगी 1001 पौधे

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कथा व्यास पंडित राघव मिश्रा ने सुनाया गणेश-कार्तिकेय जन्म प्रसंग; बोले- “ईश्वर की कृपा ही जीवन की सबसे बड़ी धरोहर”

सीहोर | 29 जनवरी, 2026

शहर के बड़ा बाजार स्थित अग्रवाल धर्मशाला में नारी शक्ति महिला मंडल और मध्य प्रदेश अग्रवाल महासभा (जिला इकाई सीहोर) द्वारा आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस पर आस्था का सैलाब उमड़ा। इस धार्मिक आयोजन को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए समिति ने पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संकल्प लिया है।

भक्ति के साथ पर्यावरण का संदेश

आयोजन समिति की श्रीमती ज्योति अग्रवाल और श्रीमती अंजू अग्रवाल ने बताया कि कथा के माध्यम से समाज को प्रकृति से जोड़ने के लिए 1001 से अधिक पौधों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। कथा में आने वाले अतिथियों और श्रद्धालुओं को स्मृति स्वरूप पौधे भेंट किए जा रहे हैं, ताकि हर घर में हरियाली और खुशहाली आए।

“चुनौतियां हमें मजबूत बनाने आती हैं”

कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने अपने संबोधन में भगवान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

  • अनंत कृपा: भगवान की कृपा ही है जो हमें यह देव दुर्लभ मनुष्य जन्म मिला है। इसे कभी कम नहीं आंकना चाहिए।
  • संस्कारों का महत्व: माता पार्वती ने भगवान गणेश और कार्तिकेय को जो संस्कार दिए, उसी के कारण वे आज जगत में पूजनीय हैं।
  • चरित्र में उतारें उपदेश: भगवान के उपदेशों को केवल सुनने तक सीमित न रखें, उन्हें अपने आचरण और चरित्र में उतारें, तभी जीवन सार्थक होगा।

भावपूर्ण प्रसंग: गणेश-कार्तिकेय जन्म

चौथे दिन की कथा में भगवान गणेश और कार्तिकेय के जन्म का विस्तार से वर्णन किया गया:

  1. श्रीगणेश का प्राकट्य: कैसे माता पार्वती ने उबटन से गणेश जी की रचना की और शिव जी द्वारा हाथी का मस्तक लगाए जाने के बाद वे ‘प्रथम पूज्य’ कहलाए।
  2. कार्तिकेय का शौर्य: तारकासुर वध का प्रसंग सुनाते हुए पंडित जी ने बताया कि कार्तिकेय का जन्म धर्म और सत्य की विजय का प्रतीक है।

शुक्रवार का मुख्य आकर्षण

समिति ने जानकारी दी कि शुक्रवार को कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीगणेश के विवाह महोत्सव का भव्य प्रसंग सुनाया जाएगा। श्रद्धालुओं से इस आनंदोत्सव में सम्मिलित होने की अपील की गई है।

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