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शाकिर सदन में हुई बैठक में सरकार की नीतियों पर निशाना — कहा, “भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”
भोपाल / मध्यप्रदेश में किसानों की लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा, मध्यप्रदेश की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुवार 9 अक्टूबर को भोपाल के शाकिर सदन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अध्यक्ष अनिल यादव ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय किसान सभा (शाकिर सदन) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रह्लाद वैरागी ने किया।
बैठक में राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा गया कि अतिवृष्टि, खाद संकट, अधूरी खरीदी व्यवस्था, बिजली बिलों और स्मार्ट मीटर थोपने जैसे मुद्दों ने किसानों को गहरी परेशानी में डाल दिया है।

किसानों के प्रति सरकार का गैरजिम्मेदार रवैया
संयुक्त किसान मोर्चे ने आरोप लगाया कि अतिवृष्टि से बर्बाद फसलों के बाद भी सरकार की ओर से कोई राहत नहीं दी गई।
“प्रदेश में किसानों की आत्महत्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार चुप है। यह विडंबना है कि देश के कृषि मंत्री इसी प्रदेश के हैं, फिर भी किसानों की सुध नहीं ली जा रही है।”
मोर्चे ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने अब तक किसान प्रतिनिधियों से एक भी बैठक नहीं की है, जबकि गांवों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
मुख्य मांगें — “भावान्तर नहीं, भाव चाहिए”
बैठक में किसानों की परेशानियों के समाधान के लिए 10 प्रमुख मांगें तय की गईं —
- भावान्तर योजना खत्म कर MSP पर खरीदी सुनिश्चित की जाए, और कम कीमत पर खरीदने वालों पर कार्रवाई हो।
- धान का समर्थन मूल्य 3300 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
- अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई पटवारी हलके के औसत उत्पादन के आधार पर की जाए।
- खाद की पर्याप्त उपलब्धता पहले से सुनिश्चित की जाए।
- नकली खाद-बीज के सौदागरों पर सख्त कार्रवाई कर अधिकारियों को दंडित किया जाए।
- लैंड पूलिंग और जबरिया अधिग्रहण रोके जाएं, और 2013 भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उचित मुआवजा व पुनर्वास दिया जाए।
- किसानों को दिन में कम से कम 12 घंटे बिजली दी जाए, बढ़े हुए बिल रद्द हों और स्मार्ट मीटर योजना बंद की जाए।
- आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार को मुआवजा और एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए।
- कपास किसानों को हुए घाटे की भरपाई और मुक्त व्यापार समझौतों से कृषि को बाहर रखा जाए।
- रबी की फसलों के नए MSP की समीक्षा, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार दरें तय की जाएं।
आंदोलन का कार्यक्रम
मोर्चे ने तय किया कि किसानों की इन मांगों को लेकर 15 अक्टूबर को प्रदेश भर में कलेक्टर और तहसील कार्यालयों पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
अगर 10 दिन में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो 27 अक्टूबर (सोमवार) को राजधानी भोपाल में विशाल किसान प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

“यह आंदोलन किसानों के हक की लड़ाई है। यदि सरकार ने अब भी अनदेखी की, तो राज्यव्यापी संघर्ष तेज किया जाएगा।” — संयुक्त किसान मोर्चा
बैठक में मौजूद प्रमुख किसान नेता
बैठक में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज, बीकेयू (टिकैत) के अनिल यादव, अखिल भारतीय किसान सभा (शाकिर सदन) के प्रह्लाद वैरागी, किसान जाग्रति संगठन के इरफान जाफरी, और बीकेयू (महाशक्ति) के प्रदेश अध्यक्ष राम जगदीश दांगी शामिल रहे।

इसके अलावा कई वरिष्ठ किसान नेता जैसे आराधना भार्गव (किसान संघर्ष समिति), अखिलेश यादव (मप्र किसान सभा), मनीष श्रीवास्तव (ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन), बाबू सिंह राजपूत (क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन), विजय कुमार (ऑल इंडिया किसान क्रांतिकारी सभा) और बुद्धसेन सिंह गोंड (मप्र आदिवासी एकता महासभा) ने भी बैठक का समर्थन किया।




