“सद्गुरु मिलें तो अनगिनत फल”: बरखेड़ी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई गुरु रविदास जयंती

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दोराहा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ी में उमड़ा जनसैलाब; संत शिरोमणि के एकता और समरसता के संदेश को किया याद

दोराहा (सीहोर) | 01 फरवरी, 2026

“तीर्थ यात्रा से केवल एक पुण्य फल मिलता है, संत के मिलने पर चार फल मिलते हैं— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। परंतु सच्चे सद्गुरु के मिलने पर अनगिनत फल और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।” इन्हीं पावन विचारों के साथ सीहोर जिले के ग्राम बरखेड़ी (दोराहा) में महान संत, समाज सुधारक और दर्शनशास्त्री परम संत गुरु रविदास जी का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया।

सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध ‘मशाल’ थे गुरु रविदास

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने गुरु रविदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने का भगीरथ प्रयास किया। उन्होंने ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ का अमर संदेश देकर मानवता को एकता के सूत्र में पिरोया।

भजन-कीर्तन और भव्य आयोजन

जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में ग्राम बरखेड़ी में विशेष आयोजन किए गए:

  • भक्तिमय वातावरण: सुबह से ही गुरु रविदास जी की प्रतिमा का पूजन-अर्चन किया गया और भक्ति संगीत के माध्यम से उनके दोहों का गायन हुआ।
  • एकता का संदेश: उपस्थित ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने समाज में समरसता और भाईचारे को बनाए रखने का संकल्प लिया।
  • हर्षोल्लास: कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया और सभी ने एक-दूसरे को गुरु पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

नमन: सामाजिक एकता के अग्रदूत और आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक महान संत गुरु रविदास जी को उनके जन्मोत्सव पर कोटि-कोटि नमन।

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