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इंदौर | शहर में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे भावनाओं और डर का सहारा लेकर ‘डीपफेक’ (Deepfake) तकनीक के जरिए ठगी कर रहे हैं। इंदौर के एक 10वीं के छात्र के मामले में क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच तेज कर दी है। आरोपियों के तार हरियाणा, यूपी और बिहार से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
क्या है पूरा मामला?
10वीं कक्षा का एक छात्र कोचिंग जाने के बाद लापता हो गया था। परेशान परिजनों ने मदद के लिए बच्चे का फोटो और मोबाइल नंबर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। बस यही जानकारी बदमाशों के लिए हथियार बन गई।
- खौफनाक साजिश: बदमाशों ने बच्चे के फोटो का इस्तेमाल कर एक AI जनित डीपफेक वीडियो बनाया।
- फिरौती की मांग: परिजनों को वीडियो कॉल कर ऐसा दिखाया गया कि बच्चा उनके कब्जे में है। वीडियो में बच्चे को चाकू मारते हुए दिखाकर डराया गया।
- लाखों की ठगी: डर के मारे परिजनों ने बदमाशों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड (QR Code) पर 1 लाख 2 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
एडिशनल डीसीपी (क्राइम ब्रांच) राजेश दंडोतिया के अनुसार, इस गिरोह ने बेहद शातिर तरीके से अलग-अलग राज्यों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया है:
- लोकेशन: जिस नंबर से कॉल आया वह हरियाणा की सिम है।
- बैंक खाता: ठगी की राशि उत्तर प्रदेश के एक बैंक खाते में जमा हुई।
- कैश विड्रॉल: पैसे बिहार के एक एटीएम (ATM) से निकाले गए हैं।
क्राइम ब्रांच का अगला कदम
क्राइम ब्रांच की टीम तकनीकी साक्ष्यों (Technical Evidence) और बैंक के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। पुलिस की एक विशेष टीम जल्द ही आरोपियों को दबोचने के लिए दूसरे राज्यों के लिए रवाना हो सकती है।
🚨 एडवायजरी: सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते समय बरतें सावधानी
एक्सपर्ट टिप: यदि आपका कोई अपना लापता होता है, तो सोशल मीडिया पर फोटो डालते समय अपना नंबर सार्वजनिक न करें। सीधे पुलिस की मदद लें। कोई भी वीडियो कॉल आने पर घबराएं नहीं, तकनीक का सहारा लेकर अपराधी आपको गुमराह कर सकते हैं।
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