Drnewsindia अहमदपुर/सीहोर: सीहोर जिले के अहमदपुर और आसपास के वन परिक्षेत्रों में पिछले कई महीनों से जंगली जानवरों की हलचल ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पीलूखेड़ी से लेकर चंदेरी तक, बाघ और तेंदुए की मौजूदगी से दहशत का माहौल है।
जहां एक तरफ अहमदपुर क्षेत्र में तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा शिफ्ट किया जा रहा है, दोपहर हसनपुर तिनोनिया स्थित गौशाला के पास तेंदुआ देखा गया, जिसे ग्रामीणों ने मिलकर भगाया। इससे पहले चरनाल और भैरूपुरा के जंगलों में भी इसे देखा गया था।वहीं चंदेरी गांव में बाघ की दहाड़ ने किसानों को खेतों से दूर कर दिया है।
1. अहमदपुर क्षेत्र: पिंजरा फेल, अब नई जगह होगी शिफ्टिंग
अहमदपुर वन परिक्षेत्र के पीलूखेड़ी, कोलूखेड़ी, जैतला और जुगराजपुरा में पिछले कई महीनों से तेंदुए का मूवमेंट बना हुआ है।
- पिंजरा शिफ्टिंग: डिप्टी रेंजर हरिप्रसाद डागर ने बताया कि पथरिया की बड़ली में 10 दिन से पिंजरा लगा था, लेकिन तेंदुआ हाथ नहीं आया। अब इसे कोलूखेड़ी और जेतला के बीच शिफ्ट किया जा रहा है, क्योंकि यहाँ तेंदुए की हलचल अधिक है।
- ताजा लोकेशन: दोपहर हसनपुर तिनोनिया स्थित गौशाला के पास तेंदुआ देखा गया, जिसे ग्रामीणों ने मिलकर भगाया। इससे पहले चरनाल और भैरूपुरा के जंगलों में भी इसे देखा गया था।
2. चंदेरी गांव: नाले से सुनाई दी बाघ की दहाड़, पंजों के निशान मिले
अहमदपुर के साथ-साथ चंदेरी और रामाखेड़ी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी से किसान खौफजदा हैं।
- आधी रात की दहशत: चंदेरी गांव में बीती रात करीब 2 बजे नाले के पास बाघ की तेज दहाड़ सुनाई दी।
- पंजों के निशान: चंदेरी और रामाखेड़ी के खेतों में बाघ के पंजों के निशान (Pugmarks) साफ देखे जा सकते हैं।
- खेती प्रभावित: बाघ के डर से किसान रात में खेतों में पानी देने नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीण रातभर जागकर अपने परिवार और मवेशियों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
3. वन विभाग की सुस्ती पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहे हैं।
चेतावनी: चंदेरी, रामाखेड़ी, उलझावन और रलावती के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गश्त नहीं बढ़ाई गई और बाघ-तेंदुए को रेस्क्यू नहीं किया गया, तो वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और वन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर उग्र आंदोलन करेंगे।

4. वन विभाग का पक्ष: अफवाह या हकीकत?
डिप्टी रेंजर हरिप्रसाद डागर का कहना है कि:
- जंगली जानवर अक्सर पानी की तलाश में खेतों की ओर रुख करते हैं।
- कई बार ग्रामीण जंगली बिलाव या अन्य छोटे जानवरों को देखकर तेंदुए की अफवाह फैला देते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है।
- विभाग ट्रैक्टर-ट्रॉली की व्यवस्था होते ही पिंजरे को नई लोकेशन पर लगा देगा और निगरानी जारी है।




