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सीहोर | 31 मार्च, 2026 किसानों को खाद (उर्वरक) वितरण में पारदर्शिता लाने और भीड़भाड़ से बचाने के लिए जिले में लागू की गई ई-टोकन प्रणाली की जमीनी हकीकत परखने के लिए प्रशासन सख्त हो गया है। कलेक्टर श्री बालागुरू के. के निर्देशानुसार कृषि और राजस्व विभाग की टीमें लगातार उर्वरक केंद्रों का औचक निरीक्षण कर रही हैं।
भैरूंदा में रावल ट्रेडर्स पर अधिकारियों की दबिश
निरीक्षण अभियान के तहत भैरूंदा तहसीलदार श्री सौरभ शर्मा और कृषि एसडीओ श्री बीएस राज ने ‘रावल ट्रेडर्स’ उर्वरक विक्रय केंद्र की जांच की। इस दौरान अधिकारियों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिया:
- ई-विकास पोर्टल: पोर्टल के माध्यम से हो रही विक्रय प्रक्रिया की लाइव जानकारी ली गई।
- स्टॉक सत्यापन: दुकान में मौजूद खाद के स्टॉक और रजिस्टरों (अभिलेखों) का मिलान किया गया।
- सत्यापन अनिवार्य: अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पोर्टल पर किसान का पूर्ण सत्यापन होने के बाद ही खाद का वितरण किया जाए।
कलेक्टर के सख्त निर्देश: पोर्टल संचालन का प्रशिक्षण जरूरी
कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने जिले के सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे केवल स्टॉक न जांचें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि:
- विक्रेताओं को ई-विकास पोर्टल चलाने का सही तकनीकी ज्ञान है या नहीं।
- विक्रेताओं को पोर्टल संचालन का उचित प्रशिक्षण (Training) मिला है।
- वितरण प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो।
ई-टोकन व्यवस्था के फायदे
पारदर्शिता: खाद की कालाबाजारी पर रोक लगेगी।
सुविधा: किसानों को लाइनों में घंटों खड़ा नहीं होना पड़ेगा।
सटीक डेटा: ई-विकास पोर्टल के माध्यम से जिले में उपलब्ध और वितरित खाद का सटीक हिसाब रहेगा।




