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सीहोर/दोराहा। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान के मामले में गिरफ्तार बाप-बेटे और भाई को जब पुलिस रविवार को सीहोर न्यायालय में पेश करने पहुंची, तो वहां स्थिति तनावपूर्ण हो गई। राष्ट्रभक्ति के जज्बे से भरे अधिवक्ताओं ने न केवल आरोपियों का कड़ा विरोध किया, बल्कि कोर्ट परिसर में ही उनकी जमकर धुनाई कर दी। वकीलों ने एक सुर में फैसला लिया है कि देश का अपमान करने वाले इन लोगों की पैरवी कोई भी स्थानीय वकील नहीं करेगा।
सड़क पर बिछा दिया था राष्ट्रध्वज
घटना दोराहा थाना क्षेत्र के ग्राम सिराड़ी की है। आरोपी सलीम, उसके पुत्र समीर और भाई जलील ने बड़ी लापरवाही और दुस्साहस दिखाते हुए तिरंगे झंडे को अपने घर के सामने सड़क के बीचों-बीच बिछा दिया था। झंडा हवा में उड़े नहीं, इसके लिए आरोपियों ने उसके चारों कोनों पर पत्थर रख दिए थे। इस शर्मनाक कृत्य को देखकर ग्रामीण राहुल दांगी और अन्य लोगों का गुस्सा भड़क गया, जिसके बाद तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
कोर्ट परिसर में ‘इंसाफ’ और गहमा-गहमी
दोराहा थाना पुलिस जैसे ही तीनों आरोपियों को लेकर न्यायालय पहुंची, वहां मौजूद वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
- हाथापाई: देखते ही देखते वकीलों ने आरोपियों को घेर लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।
- पुलिस का बीच-बचाव: कोर्ट परिसर में अचानक हुई इस घटना से अफरा-तफरी मच गई। पुलिसकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बीच-बचाव किया और आरोपियों को वकीलों के घेरे से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले गए।
वकीलों का ऐतिहासिक निर्णय: “नहीं लड़ेंगे केस”
घटना के बाद अधिवक्ता समुदाय ने सामूहिक रूप से एक बड़ा निर्णय लिया है। सीहोर के वकीलों का कहना है कि:
“तिरंगा हमारी आन-बान और शान है। जो लोग राष्ट्रीय ध्वज को सड़क पर बिछाकर उसका अपमान कर सकते हैं, उन्हें कानूनी सहायता पाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। सीहोर का कोई भी स्थानीय वकील इनकी तरफ से कोर्ट में खड़ा नहीं होगा।”
सख्त धाराओं में मामला दर्ज, भेजे गए जेल
दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा के नेतृत्व में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 और 3 के तहत केस दर्ज किया है। न्यायालय में पेशी के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
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