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सीहोर। माध्यमिक शिक्षा मंडल की हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। एक तरफ छात्र अपनी मेहनत से भविष्य संवारने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ शहर से लेकर गांवों तक डीजे और लाउडस्पीकर का शोर उनकी एकाग्रता की धज्जियां उड़ा रहा है।
पढ़ाई में ‘विलेन’ बना बेकाबू शोर
जिले भर में शादी-विवाह, जुलूस और रैलियों के नाम पर ध्वनि विस्तारक यंत्रों का अनियंत्रित उपयोग हो रहा है। आलम यह है कि सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक कान फोड़ू संगीत और लाउडस्पीकर की आवाजें छात्रों के कमरे तक पहुंच रही हैं।

छात्रों का दर्द: “हम रात-रात भर जागकर रिवीजन करना चाहते हैं, लेकिन बाहर बज रहे डीजे के कारण सिरदर्द होने लगता है। क्या हमारी मेहनत की प्रशासन को कोई फिक्र नहीं है?”
इछावर से वायरल हो रहे वीडियो दे रहे गवाही
विशेष रूप से इछावर क्षेत्र से लगातार ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जहाँ नियमों को ताक पर रखकर तेज आवाज में डीजे बजाए जा रहे हैं। इन वीडियो के वायरल होने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
⚖️ नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक उदासीनता
नियमों के मुताबिक, परीक्षा के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर कड़े प्रतिबंध होने चाहिए, लेकिन सीहोर में स्थिति इसके उलट है:
- धार्मिक और राजनीतिक आयोजन: बिना किसी समय सीमा के बजते लाउडस्पीकर।
- शादी-समारोह: देर रात तक डीजे का शोर।
- कार्रवाई का अभाव: शिकायत के बावजूद मौके पर ठोस एक्शन की कमी।
छात्रों की मांग: “हमे शोर नहीं, शांति चाहिए”
प्रभावित छात्रों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि परीक्षाओं के समापन तक डीजे और लाउडस्पीकर पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना या जब्ती की कार्रवाई की जाए।
संपादकीय टिप्पणी: क्या उत्सवों का शोर छात्रों के भविष्य से बड़ा है? प्रशासन को अब नींद से जागना होगा, इससे पहले कि शोर की भेंट किसी मेधावी छात्र का परिणाम चढ़ जाए।




