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सीहोर। एक ओर जहां 10वीं और 12वीं के छात्र अपने भविष्य की इबारत लिख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी की लापरवाही उन्हें ‘अंधेरे’ में धकेल रही है। शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण मंडी क्षेत्र में इन दिनों हालात किसी पिछड़े गांव से भी बदतर हो गए हैं। दिन भर में 7 से 8 बार होने वाली अघोषित कटौती ने छात्रों, व्यापारियों और आम जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
🚩 गणित के पेपर में भी ‘गुल’ रही बिजली
बिजली विभाग की संवेदनहीनता की हद मंगलवार को तब देखने को मिली जब 10वीं कक्षा का गणित जैसा कठिन पेपर था।
- परीक्षा के समय कटौती: सुबह 9 से 12 बजे की परीक्षा के दौरान ठीक 9:15 बजे बिजली काट दी गई।
- प्रभावित केंद्र: CM राइज मनुबेन स्कूल और स्वामी विवेकानंद स्कूल जैसे केंद्रों पर छात्र उमस और अंधेरे में पेपर देने को मजबूर हुए।
- सवाल: क्या बोर्ड परीक्षाओं के दौरान निर्बाध बिजली देना विभाग की प्राथमिकता नहीं है?
🔇 सत्ताधारी पार्षदों का ‘मौन’ जनता पर भारी
मंडी क्षेत्र नगर पालिका के चार प्रमुख वार्डों (20, 22, 23 और 25) में फैला है। विडंबना देखिए:
- दिग्गज चुप हैं: वार्ड 23 से दिलीप राठौर, वार्ड 22 से विशाल राठौर और वार्ड 25 से मुकेश मेवाड़ा जैसे सत्ताधारी भाजपा पार्षद होने के बावजूद समस्या जस की तस है।
- जनता का आरोप: चुनाव में बड़े वादे करने वाले ये नेता अब जनता की तकलीफ पर चुप्पी साधे बैठे हैं। क्षेत्र में एक साहसी जनप्रतिनिधि का अभाव साफ खल रहा है।
🏭 ठप पड़ा व्यापार और उद्योग
मंडी क्षेत्र केवल रिहायशी नहीं, बल्कि औद्योगिक हब भी है।
- इंडस्ट्रियल एरिया: बार-बार होने वाली ट्रिपिंग से मशीनों में खराबी आ रही है और उत्पादन ठप है।
- मेंटेनेंस का बहाना: व्यापारियों का आरोप है कि शिकायत करने पर अधिकारी केवल ‘मेंटेनेंस’ का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते हैं।
🗣️ जनता की हुंकार: “बिल शहरी, सुविधा ग्रामीण क्यों?”
स्थानीय रहवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि जब वे शहरी दरों पर बिजली बिल का भुगतान करते हैं, तो उन्हें गांव जैसी अघोषित कटौती क्यों झेलनी पड़ रही है? परीक्षाओं के इस नाजुक समय में विभाग और जनप्रतिनिधियों की यह ‘जुगलबंदी’ छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है।
📊 मंडी क्षेत्र की बिजली समस्या: एक नजर में
| समस्या | प्रभाव |
| अघोषित कटौती | दिन में 7 से 8 बार |
| मुख्य शिकार | बोर्ड परीक्षार्थी (10वीं/12वीं) |
| आर्थिक नुकसान | मंडी और इंडस्ट्रीज एरिया ठप |
| जनप्रतिनिधि | वार्ड 20, 22, 23, 25 के पार्षद मौन |
संपादकीय टिप्पणी: प्रशासन और बिजली विभाग को यह समझना होगा कि बिजली सिर्फ सुविधा नहीं, छात्रों के करियर की जरूरत है। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो जनता का यह आक्रोश सड़कों पर उतर सकता है।




