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सीहोर | 23 जनवरी 2026 शहर के गंज क्षेत्र स्थित करोली माता मंदिर में इन दिनों भक्ति का सैलाब उमड़ा हुआ है। गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित सहस्त्र चंडी महायज्ञ के आठवें दिन गुरुवार को यज्ञशाला मंत्रोच्चार और आहुतियों से महक उठी। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए आहुतियां समर्पित कीं।
महायज्ञ की मुख्य बातें: आस्था का भव्य स्वरूप
- आहुतियों का कीर्तिमान: गुरुवार को एक ही दिन में 5 लाख 10 हजार आहुतियां दी गईं।
- सतरंगी छटा: देर शाम यज्ञ मंडप को सतरंगी रोशनी से सजाया गया, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
- भजन संध्या: रात्रि में भव्य आतिशबाजी के साथ सुप्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
- यजमान: कार्यक्रम अध्यक्ष विवेक राठौर और मुख्य यजमान तरुण राठौर सहित 45 जोड़ों ने यज्ञ में आहुतियां दीं।
मां कूष्माण्डा का पूजन: ब्रह्मांड की रचयिता की महिमा
यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा ने बताया कि नवरात्रि के विशेष क्रम में आज माँ कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना की गई।
“माना जाता है कि मां कूष्माण्डा की एक मंद मुस्कान से ही इस ब्रह्मांड की रचना हुई थी। अष्टभुजाधारी माँ अपने आठ हाथों में सिद्धियों और निधियों की माला धारण करती हैं।”
माता का स्वरूप एक नज़र में:
- वाहन: सिंह
- शस्त्र: धनुष, बाण, चक्र और गदा।
- प्रिय अर्पण: कुम्हड़ा (संस्कृत में ‘कूष्माण्ड’), जिसके कारण इनका नाम कूष्माण्डा पड़ा।
आयोजन का महत्व: शहर में पहली बार ऐसा भव्य संगम
मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने जानकारी दी कि संयुक्त मां कालका उत्सव समिति और समस्त नगरवासियों के सहयोग से आयोजित यह सहस्त्र चंडी महायज्ञ जिले के इतिहास में एक अनूठी पहल है। यज्ञाचार्य के अनुसार, यज्ञ से निकलने वाले पवित्र धुएं से न केवल पर्यावरण की शुद्धि होती है, बल्कि नकारात्मकता का भी नाश होता है।
आगामी कार्यक्रम
दस दिवसीय इस महायज्ञ के समापन की ओर बढ़ते हुए, आने वाले दिनों में विशाल भंडारे और महाआरती का आयोजन किया जाएगा। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन और यज्ञ की परिक्रमा के लिए पहुंच रहे हैं।




