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सीहोर | जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) इस समय बड़े संकट से गुजर रही है। जिले के 10 लाख 30 हजार उपभोक्ताओं को मुफ्त राशन बांटने वाले 595 राशन दुकान संचालक पिछले चार महीने से कमीशन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। स्थिति यह है कि कई विक्रेताओं ने अब दुकानें छोड़ने का मन बना लिया है।
आंकड़ों का गणित: ₹1.68 करोड़ का भुगतान बकाया
जिले में राशन दुकान संचालकों की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:
- कुल दुकानें: 595 कंट्रोल दुकानें।
- मासिक कमीशन: ₹42 लाख से ₹45 लाख के बीच।
- कुल बकाया: सितंबर से अब तक करीब ₹1 करोड़ 68 लाख अटका हुआ है।
- कटौती की मार: विक्रेताओं का दावा है कि ₹10,500 के निर्धारित कमीशन की जगह उन्हें केवल ₹8,183 ही मिल रहे हैं।
⚠️ दुकानदारों के सामने खड़ी चुनौतियां
समय पर कमीशन न मिलने से राशन दुकानों का संचालन मुश्किल हो गया है:
- वेतन का संकट: बोरियां उठाने वाले पल्लेदारों और सहायकों को वेतन देने के पैसे नहीं हैं।
- किराए की मार: निजी भवनों में चल रही दुकानों का किराया कई महीनों से बकाया है।
- राशन की कमी: वितरण के दौरान राशन कम पड़ने की समस्या भी आम है, जिसकी भरपाई संचालकों को खुद करनी पड़ रही है।
- पुरानी देनदारी: संचालकों का आरोप है कि जनवरी 2024 का कमीशन भी आज तक उनके खातों में नहीं आया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
“जिले भर में समय पर राशन का वितरण किया जा रहा है। जो कमीशन रुका हुआ है, उसका शासन स्तर से जल्द ही भुगतान होने वाला है।” — आकाश चंदेल, प्रभारी खाद्य आपूर्ति अधिकारी
विक्रेताओं की प्रमुख मांगें
- पेंडिंग कमीशन का तुरंत भुगतान: सितंबर से रुके हुए ₹1.68 करोड़ तत्काल जारी किए जाएं।
- पूरा मानदेय: कमीशन में की जा रही ₹2,000 की अघोषित कटौती बंद हो।
- भवन निर्माण: राशन दुकानों के लिए सरकारी भवनों की व्यवस्था की जाए ताकि किराए का बोझ कम हो।
- अतिरिक्त राशन: वितरण के दौरान होने वाली ‘घटत’ (Shortage) को देखते हुए अतिरिक्त राशन की आपूर्ति हो।




