drnewsindia.com
वाराणसी | संकट मोचन संगीत समारोह के 103 साल के इतिहास में पहली बार एक अनोखा प्रयोग देखने को मिला। मंच पर जब महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कालजयी रचना ‘राम की शक्ति पूजा’ और तुलसीदास के पदों का नृत्य-नाटिका के जरिए मिलन हुआ, तो पूरा परिसर भक्ति के रस में सराबोर हो गया।

1. ‘चित्रकूट’ नृत्य-नाटिका: 45 मिनट में जी उठी रामायण
रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल के निर्देशन में 15 दिनों के कड़े अभ्यास के बाद ‘चित्रकूट’ का मंचन हुआ।
- खास पल: जब भगवान राम (स्वाति) अपनी ‘नीलकमल’ जैसी आंख मां दुर्गा को अर्पित करने बढ़े, तो दर्शक भावुक हो उठे।
- पात्र: स्वाति ने राम और नंदिनी ने सीता व दुर्गा की भूमिका निभाई। लक्ष्मण, हनुमान और जटायु के रूप में तापस ने जीवंत अभिनय किया।
- संगीत: जेपी शर्मा और आशीष मिश्र के संगीत संयोजन ने इसे और भी भव्य बना दिया।

2. संतूर और तबले पर ‘हिमालयी’ धुन
समारोह की दूसरी प्रस्तुति दो दिग्गज पद्मविभूषण कलाकारों के पुत्रों की रही।
- जुगलबंदी: पं. शिवकुमार शर्मा के पुत्र पं. राहुल शर्मा (संतूर) और पं. छन्नूलाल मिश्र के पुत्र पं. राम कुमार मिश्र (तबला) ने राग ‘गोरख कल्याण’ से शुरुआत की।
- अहसास: जब उन्होंने ‘धुनि पहाड़ी’ छेड़ी, तो ऐसा लगा मानो संगीत की धारा कल-कल करती हिमालय की वादियों से नीचे उतर रही हो।

3. विधा लाल का ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’ प्रदर्शन
दिल्ली से आईं बनारस घराने की मशहूर कथक नृत्यांगना विधा लाल ने अपनी थिरकन से साबित कर दिया कि उन्हें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में क्यों जगह मिली है।
- टक्कर: उनके पैरों की चाप और घुंघरुओं की झंकार तीन-तीन तबलों की थाप पर भारी पड़ती दिखी।
- समर्पण: विदुषी सितारा देवी की शिष्या विधा ने ‘शंभू शिव शंभू स्वयंभू’ पर थिरकते हुए अपना नृत्य गुरु को समर्पित किया। उनके पंजों की नसें भी जैसे कथक की ताल पर थिरक रही थीं।

4. कला दीर्घा: ‘चंदन किवाड़’ ने खींचा ध्यान
मंदिर परिसर में सजी पेंटिंग प्रदर्शनी में युवा कलाकारों की सृजनात्मकता देखते ही बन रही है।
- मास्टरपीस: औसानगंज के ऋतिक जायसवाल ने 200 घंटे की मेहनत से ‘चंदन का किवाड़’ पेंटिंग बनाई, जो लोकगायिका मालिनी अवस्थी की पुस्तक पर आधारित है।
- अन्य आकर्षण: हर्षिता की ‘पवन पुत्र’ और शैलजा गुप्ता की मात्र 3 घंटे में तैयार ‘लंका दहन’ पेंटिंग ने भी लोगों को रुकने पर मजबूर कर दिया।

आज के आकर्षण (Highlights):
- तुलसी-निराला का पहली बार नृत्य-अभिनय मिलन।
- 103वां साल: परंपरा और आधुनिकता का मेल।
- सजीव चित्रण: जटायु संग्राम से लेकर रावण युद्ध तक के चार अध्याय।

काशी की कला और संस्कृति की हर अपडेट के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।




