हिमाचल के एंट्री टैक्स बैरियरों पर ‘खुली लूट’: फास्टैग सिस्टम न होने का फायदा उठा रहे ठेकेदार, ₹100 की जगह ₹200 की अवैध वसूली

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drnewsindia.com

शिमला | हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वारों (Entry Tax Barriers) पर पारदर्शिता लाने के सरकारी दावे हवा साबित हो रहे हैं। प्रदेश के अधिकांश बैरियरों पर अब तक फास्टैग (Fastag) सुविधा शुरू नहीं हो पाई है, जिसका सीधा फायदा उठाकर ठेकेदार और कर्मचारी वाहन चालकों से सरेआम ‘अवैध वसूली’ कर रहे हैं। सबसे ज्यादा मार हिमाचल नंबर के 12+1 सीटर टैक्सी वाहनों पर पड़ रही है।

क्या है ‘वसूली’ का खेल?

नियमों के अनुसार, हिमाचल नंबर के 12+1 सीटर टैक्सी वाहनों के लिए 100 रुपये का शुल्क निर्धारित है। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार:

  • दोगुनी वसूली: बैरियरों पर कंप्यूटर से पर्ची काटकर चालकों से 200 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
  • पर्ची में झोल: दी जा रही पर्चियों में शुल्क (Rate) का स्पष्ट उल्लेख नहीं होता, जिससे चालकों को वास्तविक दर का पता ही नहीं चलता।
  • मजबूरी का फायदा: समय की कमी और विवाद से बचने के लिए टैक्सी चालक चुपचाप अधिक भुगतान करने को मजबूर हैं।

क्यों फेल हो रही है व्यवस्था? (3 मुख्य कारण)

  1. फास्टैग का इंतजार: सरकार ने नकद लेनदेन खत्म करने के लिए फास्टैग लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर अब तक यह सिस्टम शुरू नहीं हुआ।
  2. नियमों का उल्लंघन: आबकारी (Excise) नियमों में 12+1 सीटर टैक्सी के लिए ₹200 का कोई प्रावधान नहीं है, फिर भी खुलेआम वसूली जारी है।
  3. निगरानी की कमी: बैरियरों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की सख्त मॉनिटरिंग का अभाव दिख रहा है।

टैक्सी चालकों में भारी आक्रोश

टैक्सी संचालकों का कहना है कि एक तरफ महंगाई की मार है, वहीं दूसरी तरफ बैरियरों पर हो रही इस अवैध वसूली से उनका बजट बिगड़ रहा है। बिना फास्टैग के नकद लेनदेन से न केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि सरकार की छवि पर भी दाग लग रहा है।

“जब सरकार ने फास्टैग की घोषणा कर दी है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों? ठेकेदार अपनी मर्जी से रेट तय कर रहे हैं और हम लूटने को मजबूर हैं।”स्थानीय टैक्सी चालक


हमारी मांग / सुझाव:

  • तत्काल फास्टैग: सभी बैरियरों को जल्द से जल्द फास्टैग से जोड़ा जाए ताकि ऑनलाइन पेमेंट से ओवरचार्जिंग खत्म हो।
  • रेट बोर्ड: हर बैरियर पर वाहनों की श्रेणियों के अनुसार रेट बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं।
  • हेल्पलाइन नंबर: अवैध वसूली की शिकायत के लिए बैरियरों पर टोल-फ्री नंबर प्रदर्शित किए जाएं।

हिमाचल की व्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी मुहिम के साथ बने रहें।

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