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शिमला/बिलासपुर | हिमाचल प्रदेश में भवन निर्माण सामग्री (Construction Material) की कीमतों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। ईंटों की बढ़ती कीमतों के बाद अब सीमेंट कंपनियों ने प्रति बैग 15 रुपये की सीधी बढ़ोतरी कर दी है। वहीं, सरिये के दामों में भी पिछले 20 दिनों के भीतर 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक का इजाफा दर्ज किया गया है। सोमवार से लागू हुए इन नए रेट्स ने आम आदमी के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है।
सीमेंट के नए रेट्स: ब्रांड वार कीमतों पर एक नजर
प्रदेश के विभिन्न जिलों में अब सीमेंट की बोरियां नई कीमतों पर मिलेंगी:
| सीमेंट ब्रांड | पुरानी कीमत (₹) | नई कीमत (₹) |
| एसीसी सुरक्षा | 395 | 410 |
| एसीसी गोल्ड | 435 | 450 |
| अंबुजा सीमेंट | 400 | 415 |
| अल्ट्राटेक | 390 | 405 |
| बांगड़ सीमेंट | 385 | 400 |
नोट: चंबा और दूरदराज के क्षेत्रों में परिवहन के कारण कीमतें ₹425 से ₹465 तक पहुंच गई हैं।
सरिया भी हुआ ‘लाल’: हमीरपुर से चंबा तक बढ़े दाम
सरिये की कीमतों में ब्रांड के आधार पर 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की ताजा बढ़ोतरी हुई है।
- टाटा सरिया: ₹6800 से बढ़कर ₹7000 प्रति क्विंटल।
- कामधेनु: ₹6500 से बढ़कर ₹6700 प्रति क्विंटल।
- जिंदल: ₹6400 से बढ़कर ₹6600 प्रति क्विंटल।
- हमीरपुर में 12 एमएम सरिया जो पहले ₹6100 था, अब ₹6600 के पार पहुंच गया है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम? (4 प्रमुख कारण)
विशेषज्ञों और विक्रेताओं के अनुसार, निर्माण सामग्री महंगी होने के पीछे ये मुख्य वजहें हैं:
- कोयले की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोयले के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ गई है।
- परिवहन लागत: डीजल की कीमतों और लॉजिस्टिक्स खर्च में इजाफा।
- कच्चा माल: रॉ मटेरियल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि।
- वैश्विक प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होना।
आम आदमी पर दोहरी मार
कुछ दिन पहले ही प्रदेश में ईंट की कीमतों में 2 से 3 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। अब सीमेंट और सरिये के दाम बढ़ने से एक औसत मकान बनाने की लागत में लाखों रुपये का अंतर आने की संभावना है। सरकारी और निजी दोनों ही क्षेत्रों के निर्माण कार्य इससे प्रभावित होने तय हैं।
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