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राजधानी पटना के कंकड़बाग (PC कॉलोनी) और हाईकोर्ट परिसर में कौओं और मुर्गियों की अचानक मौत के बाद H5N1 वायरस की पुष्टि हुई है। इसे देखते हुए पटना जू प्रशासन ने एहतियातन कड़े कदम उठाए हैं।

🚫 मुख्य अपडेट: 7 मार्च तक ताला लटका
बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए संजय गांधी जैविक उद्यान को 7 मार्च 2026 तक आम जनता के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। जू प्रशासन का कहना है कि पशु-पक्षियों और इंसानों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
🛡️ जू के अंदर ‘कवच’: बचाव के लिए उठाए गए 5 बड़े कदम
जू प्रशासन ने 2018 की उस घटना से सबक लिया है जब 6 मोरों की मौत के बाद जू को 20 दिनों तक बंद करना पड़ा था। इस बार सुरक्षा घेरा और भी सख्त है:
- फूट वॉश अनिवार्य: मेन गेट पर पोटाशियम परमैगनेट का घोल रखा गया है। हर कर्मी को ‘फूट वॉश’ के बाद ही एंट्री मिल रही है।
- कीटनाशक का छिड़काव: मोर और अन्य संवेदनशील पक्षियों के बाड़ों के आसपास लगातार दवाओं का छिड़काव जारी है।
- कर्मियों की सुरक्षा: बर्ड सेक्शन में तैनात सभी गार्ड्स और केयरटेकर्स को मास्क और सैनिटाइजर अनिवार्य कर दिए गए हैं।
- 24×7 मॉनिटरिंग: पक्षियों की सेहत पर विशेषज्ञों की टीम चौबीसों घंटे नजर रख रही है।
- डाइट में बदलाव: संक्रमण के खतरे को देखते हुए चिकन को पूरी तरह हटा दिया गया है। अब मांसाहारी पक्षियों को चूजों के बजाय चूहे और वैकल्पिक आहार दिया जा रहा है।
🌡️ क्यों खतरनाक है H5N1?
विशेषज्ञों के अनुसार, H5N1 बर्ड फ्लू को कोरोना से भी अधिक घातक माना जाता है क्योंकि:
- यह जानवरों से इंसानों में बहुत तेजी से फैल सकता है।
- सिविल सर्जन ने पटना के सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।
याद रखें: 2018 में H5NA वायरस के कारण जू को लंबे समय तक बंद करना पड़ा था। इस बार प्रशासन किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।




