नवरात्रि की शुरुआत:
शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर, सोमवार से शुरू हो रही है। इस वर्ष देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो सुख-समृद्धि, राष्ट्र उन्नति और कल्याण का प्रतीक है। इस दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और हस्त नक्षत्र योग का संयोग भी बन रहा है।
🌸 मां शैलपुत्री आरती

नवरात्रि में बचें ये कार्य
- बाल कटवाना, दाढ़ी बनवाना और नाखून काटना अशुभ है।
- घर में कलश स्थापना या अखंड ज्योति के समय घर खाली न छोड़ें।
- चमड़े की वस्तुओं जैसे बेल्ट, जूते या बैग का उपयोग न करें।
यदि ज्योति बुझ जाए, तो तुरंत देवी से क्षमा प्रार्थना करते हुए उसे फिर से जलाएं।
अखंड ज्योति का महत्व
- घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- परिवार के सदस्यों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।
- शत्रुओं पर विजय और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
पूजा सामग्री
- मिट्टी का घड़ा, ढक्कन, कलावा, जटा वाला नारियल
- जल, गंगाजल, लाल कपड़ा, मिट्टी का दीपक
- फूल, घी, फूल माला, पान, सुपारी, बताशा
- आम के पत्ते, पंचमेवा, हल्दी, मौली, रोली, कमलगट्टा
- शहद, शक्कर, दूध, दही, नैवेध
- मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर
इस वर्ष नवरात्रि 10 दिन की होगी
- शारदीय नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होगी।
- तृतीया तिथि 24 और 25 सितंबर को रहेगी।
- बढ़ती तिथि शुभ और शक्ति का प्रतीक, घटती तिथि अशुभ मानी जाती है।

मां शैलपुत्री की आराधना
मंत्र:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।
पौराणिक कथा:
माता शैलपुत्री हिमालय की पुत्री और पूर्व जन्म में सती थीं। भगवान शिव से विवाह के बाद सती ने आत्मदाह किया। पुनर्जन्म में शैलपुत्री के रूप में माता ने भक्तों की रक्षा और कल्याण का कार्य किया।
पूजाविधि:
- स्नान और ध्यान के बाद शुभ मुहूर्त में पूजा प्रारंभ करें।
- कलश स्थापना के बाद चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर अक्षत रखें।
- मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- गंगाजल से अभिषेक करें।
- लाल वस्त्र, लाल फूल, लाल चंदन और लाल फल अर्पित करें।
- अंत में आरती करें और प्रसन्न करें।
शैलपुत्री की उपासना से लाभ
- सांसारिक सुख और मोक्ष दोनों की प्राप्ति।
- जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
- साधक को उन्नति और आत्मबल प्राप्त होता है।




