drnewsindia.com/सीहोर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में जिलेभर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को बाल्मीकि जयंती के अवसर पर ग्राम निवारिया मंडल केंद्र पर संघ द्वारा पथ संचलन निकाला गया। यह संचलन ग्राम के हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर पूरे गांव का भ्रमण करते हुए पुनः हनुमान मंदिर पर आकर संपन्न हुआ।
गांव में मार्गभर स्वयंसेवकों का उत्साह देखने लायक था। संचलन के दौरान नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का भव्य स्वागत किया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे श्री राजेश विश्वकर्मा, जिला कृषक कार्य प्रमुख, सीहोर। उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मां जगदंबा की शक्ति आराधना, विजयदशमी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व तथा असत्य पर सत्य की विजय पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अत्याचारी रावण का वध कर अधर्म पर धर्म की विजय प्राप्त की थी, वहीं पांडवों ने अज्ञातवास पूर्ण कर शस्त्र पूजा कर युद्ध की घोषणा की थी। यह परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है कि धर्म और राष्ट्र की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहें।
मुख्य वक्ता ने कहा कि भारत का इतिहास सदैव विजयशाली रहा है। हमने कभी किसी भी अत्याचारी की गुलामी स्वीकार नहीं की। प्राचीन भारत समृद्ध, शक्तिशाली और सांस्कृतिक रूप से वैभवशाली राष्ट्र रहा है। उन्होंने कहा कि जब-जब हमने अपने इतिहास और संस्कृति को भुलाया है, तब-तब हमें गुलामी सहनी पड़ी है।
उन्होंने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना का स्मरण करते हुए बताया कि संघ ने “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्रीय निर्माण” का संकल्प लिया था।

राजेश विश्वकर्मा ने अपने उद्बोधन में संघ के गौरवपूर्ण इतिहास की झलक भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों ने दादरा-नगर हवेली को पुर्तगालियों से मुक्त करवाया, कश्मीर का भारत में विलय कराने में भूमिका निभाई, तथा गोवा मुक्ति आंदोलन में भी संघ के स्वयंसेवकों ने अग्रणी भूमिका निभाई।
इसी प्रकार भारत-चीन युद्ध तथा 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों के दौरान स्वयंसेवकों ने सैनिकों के साथ कदम से कदम मिलाकर राष्ट्रसेवा का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि आज संघ विश्व के अनेक देशों में विभिन्न रूपों में कार्य कर रहा है, वहीं भारत में भी स्वयंसेवक राष्ट्रभक्ति और सेवा के उदाहरण स्थापित कर रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में वर्षभर चलने वाले आयोजनों की रूपरेखा प्रस्तुत की और पांच प्रमुख बिंदुओं — सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी भावना — पर विशेष बल दिया।
निवारिया ग्राम के नागरिकों ने इस अवसर पर पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ पथ संचलन में सहयोग किया। संघ के स्वयंसेवकों द्वारा “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारे लगाते हुए राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में स्थानीय स्वयंसेवक और ग्रामवासी सक्रिय रूप से शामिल रहे।




