गोवर्धन पूजा 2025 : भगवान कृष्ण के अटूट विश्वास और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व

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दिवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा हिंदू संस्कृति का एक अत्यंत शुभ और आस्थापूर्ण त्योहार है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और गोवर्धन पर्वत की पूजा के रूप में मनाया जाता है। इसे अन्नकूट उत्सव भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “भोजन का पहाड़”

इस दिन भक्तजन भगवान कृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजन (छप्पन भोग) अर्पित करते हैं और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

गोवर्धन पर्वत उत्तर प्रदेश के गोकुल (मथुरा के पास) में स्थित है। कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने गांववासियों को इंद्र पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया।
भगवान इंद्र के क्रोधित होने पर उन्होंने सात दिन और सात रातों तक वर्षा कराई। तब नन्हे कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी ग्रामीणों को आश्रय दिया।
इस घटना ने मानवता को यह संदेश दिया कि — प्रकृति की पूजा और उसका सम्मान ही सच्ची भक्ति है।

  1. भक्तजन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाते हैं, उसे फूलों और रंगों से सजाते हैं।
  2. गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है और आरतीभजन-कीर्तन किए जाते हैं।
  1. भगवान कृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किया जाता है — जिनमें विविध मिठाइयाँ, नमकीन, अनाज और फल शामिल होते हैं।
  2. मथुरा, वृंदावन और गोकुल में इस दिन विशेष उत्सव होते हैं, जहाँ मंदिरों में भगवान राधा-कृष्ण का भव्य श्रृंगार किया जाता है।
  3. भक्त इस दिन माँ प्रकृति और गोवंश के प्रति भी सम्मान प्रकट करते हैं।

अन्नकूट का अर्थ होता है “भोजन का पर्वत”। इस दिन मंदिरों और घरों में विभिन्न शाकाहारी व्यंजन बनाए जाते हैं और प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।
भक्तजन मानते हैं कि भगवान कृष्ण को छप्पन भोग अर्पित करने से जीवन में समृद्धि और सुरक्षा मिलती है।

यह पर्व केवल पूजा नहीं, बल्कि एक संदेश है —

“प्रकृति हमारी रक्षक है, इसलिए उसका आदर करें।”

गोवर्धन पूजा हमें विश्वास, कृतज्ञता और एकता की भावना सिखाती है। भगवान कृष्ण का यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर सदैव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और हमें प्रकृति के प्रति सम्मान व संतुलन बनाए रखना चाहिए।

हिंदू पंचांग के अनुसार, गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है।
यह दीपावली के अगले दिन होती है — जो प्रायः अक्टूबर या नवंबर माह में आती है।

गोवर्धन पूजा एक आस्था, कृतज्ञता और प्रकृति प्रेम का पर्व है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामूहिक एकता का प्रतीक भी है।
भगवान कृष्ण के इस अनोखे उत्सव से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि —
जब हम प्रकृति की रक्षा करेंगे, तो प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी।

विषयविवरण
पर्व का नामगोवर्धन पूजा / अन्नकूट
तिथिकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
प्रमुख स्थानमथुरा, वृंदावन, गोकुल
मुख्य देवताभगवान श्रीकृष्ण
प्रमुख परंपराछप्पन भोग, परिक्रमा, गोबर पर्वत पूजा
संदेशप्रकृति का सम्मान और ईश्वर पर अटूट विश्वास

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