Drnewsindia.comआज अयोध्या में एक ऐतिहासिक और भाव-पूर्ण क्षण सामने आया है, जब राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर श्रद्धा और गौरव का प्रतीक-ध्वज फहरा — सदियों से जमे घावों के बीच उम्मीद की किरण जल उठी। नरेंद्र मोदी ने ध्वजारोहण के उपरांत कहा कि आज “सदियों के घाव भर गए” हैं।ध्वजारोहण के समय सामने की कतार में साधु-संत बैठे हुए थे। वह भी भावुकता में अपने आंसू पोछते हुए नजर आए। इस कार्यक्रम में देश-दुनिया के करीब आठ हजार लोग आमंत्रित किए गए थे।
हजारों लोग रहे मौजूद

आज हम सबके लिए सार्थकता का दिन- मोहन भागवत – फोटो : cm yogi x handle
इस अवसर पर देश-दुनिया से आए संत-महंत, विशिष्ट अतिथि और हज़ारों श्रद्धालु मौजूद रहे। सुरक्षा के कड़े इंतज़ामों के बीच राम नगरी उत्सव के रंग में डूबी रही। मंदिर परिसर से लेकर सरयू तट तक हर ओर दीप, पुष्प और रंगोलियों से सजा माहौल इस ऐतिहासिक उत्सव का साक्षात अनुभव करा रहा था।
चार से पांच मिनट के संक्षिप्त ध्वजारोहण अनुष्ठान में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रधानमंत्री ने बटन दबाकर ध्वज फहराया। सात हजार अतिथि समारोह के साक्षी बने।, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, , धर्मगुरु, व्यापार जगत के प्रमुख नाम, दलित, वंचित, किन्नर और अघोरी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल रहे।
राम मंदिर में ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी हुई। इस मौके पर पीएम मोदी ने अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा बहुत पुराना सपना अब पूरा हुआ। सदियों पुराने घाव थे अब वह धीरे-धीरे भरने शुरू हुए।
पीएम ने कहा कि हम ऐसा समाज बनाएं, जहां कोई गरीब न हो। कोई पीड़ित ना हो। यह ध्वज युगों युगों तक श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। उन्होंने हर दानवीर, श्रमवीर, कारीगर, योजनाकार, वास्तुकार का अभिनंदन किया। यही वह नगरी है, जहां से श्रीराम ने अपना जीवन पथ शुरू किया था। विकसित भारत बनाने के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता है। यहां सप्त मंदिर बने हैं। यहां निषाद राज का मंदिर बना है, जो साधन नहीं साध्य और उसकी भवानाओं को पूजती है। यहां जटायु जी और गिलहरी की भी मूर्ति है। जो बड़े संकल्प की सिद्धि के लिए हर छोटे से छोटे प्रयास को दिखाती है।
भागवत बोले- जिन्होंने प्राण दिए उनकी आत्मा तृत्प हुई
इस मौके पर सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि आज हम सबके लिए सार्थकता का दिन है। इसके लिए जितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा तृप्त हुई होगी। अशोक जी को वहां पर शांति मिली होगी। आज मंदिर का ध्वजारोहण हो गया। राम राज्य का ध्वज जो कभी अयोध्या में फहराता था, आज वह फहरा गया है। इस भगवा ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष है। यह वृक्ष रघुकुल की सत्ता का प्रतीक है। यह वह वृक्ष है जिसके लिए कहा जाता है, कि वृक्ष सबके लिए छाया देते हैं, स्वंय धूप में खड़े रहकर, फल भी दूसरों के लिए देते हैं।
जाते जितनी कठिनाईयां हों, सूर्य भगवान उस संकल्प का प्रतीक है। इसमें सिर्फ एक ही पहिया है। जैसे सपना उन लोगों ने देखा था, बिल्कुल वैसा ही या यूं कहें कि उससे भी भव्य मंदिर बन गया है।
हमने कहा था कि रामलला आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे






घटना का स्थान और समय
- आज दोपहर लगभग 12:00 बजे (मध्याह्न मुहूर्त) में राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर “धर्मध्वजा” (सन्निहित भगवा ध्वज) फहराई गई।
- इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मोहन भागवत (आरएसएस प्रमुख) और योगी आदित्यनाथ (उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
ध्वज-विवरण और प्रतीक
- यह भगवा ध्वज लगभग 10 फुट ऊँचा व 20 फुट लंबा है, जिसे विशेष रूप से तैयार किया गया था।
- ध्वज पर तीन प्रमुख प्रतीक अंकित हैं — ‘ॐ’, ‘सूर्य’ तथा ‘कोविदर वृक्ष’। प्रत्येक का धर्म-आध्यात्मिक संदर्भ है:
- ‘ॐ’ नित्य ब्रह्माध्वनि का प्रतीक।
- ‘सूर्य’-प्रतीक द्वारा श्रीराम के सूर्यवंशी-परिचय को दर्शाया गया।
- ‘कोविदर वृक्ष’-प्रतीक प्राचीन ज्ञान-परंपरा तथा धर्म-सत्कार का प्रतीक माना गया।
महत्व
- आज का यह समारोह इस मंदिर निर्माण के समापन का प्रतीक माना जा रहा है — यानी मंदिर के पूर्ण-रूप से तैयार हो जाने का द्योतक।
- प्रधानमंत्री मोदी ने इसे ‘सदियों से चला आ रहा इंतज़ार’ कहा, जिसमें घावों के मरने, भावनाओं के जागने व विश्वास की पुष्टि का संदेश मिला।
- पूरे शहर में श्रद्धालुओं ने “जय श्री राम” की गूंज के बीच इस क्षण को श्रद्धा-भाव से देखा।
सुरक्षा-व्यवस्था
- कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए अयोध्या में विशेष सुरक्षा-प्रबंध किए गए थे। 2.5 किमी के रास्ते को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन बनाया गया था।
- ड्रोन-निगरानी, बोट स्क्वाड्स, तकनीकी व साइबर टीमों की तैनाती की गई।
- सीएम योगी अदित्यनाथ के संबोधन में एक नई उर्जा दिखाई दी। उन्होंने कहा कि मंदिर के शिखर फहरा रहा यह केसरिया ध्वज नए भारत का प्रतीक है। 500 वर्षों में समय बदला, नेतृत्व बदला, लेकिन आस्था न झुकी, न रुकी। जब आरएसएस के हाथ में कमान आई तो सिर्फ एक ही आवाज गूंजती रही। रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।




