मध्यप्रदेश में एल्डरमैन और जनभागीदारी समितियों में नियुक्तियां जल्द

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सरकार–संगठन मंथन अंतिम चरण में, विधायकों की पसंद को मिलेगी प्राथमिकता

Drnewsindia.com/मध्यप्रदेश के स्थानीय निकायों और शिक्षण संस्थानों में एल्डरमैन और जनभागीदारी समितियों की नियुक्ति प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुँच गई है।
पिछले दो महीनों से सरकार और संगठन के बीच गहन मंथन के बाद नियुक्तियों का खाका तैयार कर लिया गया है।

भाजपा के अंदरखाने से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार नियुक्तियाँ विधायकों की पसंद को ध्यान में रखकर की जाएंगी। इसके लिए विधायकों से नाम भी मांगे जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में हुई विधायक दल की बैठक में स्पष्ट किया था कि जनभागीदारी समिति, रोगी कल्याण समिति और एल्डरमैन की नियुक्तियाँ जल्द पूरी की जाएँ। इसके बाद संगठन, जिलों के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के बीच समन्वय शुरू हो गया है।


2027 के निकाय चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव पर फोकस

भाजपा का लक्ष्य आगामी 2027 नगरीय निकाय चुनाव और उसके एक वर्ष बाद होने वाले 2028 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूती देना है।
इसी रणनीति के तहत पार्टी अपने सक्रिय कार्यकर्ताओं और नेताओं को नई जिम्मेदारियाँ देकर उन्हें मैदान में और अधिक ऊर्जावान बनाना चाहती है।


300 से अधिक जनभागीदारी समितियों का कार्यकाल समाप्त

राज्य के 500 से अधिक सरकारी कॉलेजों में वर्ष 2022 में गठित जनभागीदारी समितियों का कार्यकाल अब पूरा हो चुका है।

  • 3 नवंबर तक 300+ समितियों का कार्यकाल समाप्त
  • शेष समितियों का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है
  • सरकार ने नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू कर दी है

इन नई समितियों के गठन से कॉलेजों में प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ नए सदस्यों के हाथ में जाएँगी।


स्थानीय निकायों में नवंबर तक अधिकतर नियुक्तियाँ पूरी होंगी

राज्य सरकार नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों में भी नवंबर माह तक नियुक्तियों की प्रक्रिया पूर्ण करने की तैयारी में है।
इनमें—

  • एल्डरमैन (सभासद)
  • विभिन्न स्थायी/अस्थायी समितियों के सदस्य

जैसी महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्तियाँ शामिल होंगी।

इसके बाद निगम–मंडल और प्राधिकरणों में खाली पड़े पदों पर भी नियुक्तियाँ शुरू होंगी, जिससे सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं को स्थानीय शासन में सीधी भागीदारी का अवसर मिलेगा।


नई नियुक्तियों से संगठन को मिलेगी मजबूती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी इस प्रक्रिया के जरिए—

  • अपने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देकर सक्रियता बढ़ाना,
  • स्थानीय स्तर पर पकड़ मजबूत करना,
  • और चुनावी वर्ष से पहले उत्साहजनक वातावरण तैयार करना

चाहती है।


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