ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा: मप्र में 3 से 5% अतिरिक्त एफएआर की छूट, नियमों में बड़ा संशोधन

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Drnewsindia.com /भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा को प्रोत्साहित करने के लिए भवन निर्माण नियमों में अहम बदलाव किया है। राज्य सरकार ने मप्र भूमि विकास नियम, 2012 में संशोधन करते हुए ग्रीन बिल्डिंग के लिए 3 से 5 प्रतिशत तक अतिरिक्त एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की विशेष छूट को मंजूरी दी है। यह व्यवस्था 15 दिसंबर से पूरे प्रदेश में लागू कर दी गई है।

इस छूट का लाभ सर्टिफाइड आवासीय, व्यावसायिक और सरकारी भवनों को मिलेगा, बशर्ते वे मान्यता प्राप्त ग्रीन बिल्डिंग एजेंसियों से प्रमाणन प्राप्त करें।


ग्रीन रेटिंग के आधार पर मिलेगी अतिरिक्त एफएआर

नए नियमों के अनुसार, भवनों को उनकी ग्रीन रेटिंग के आधार पर अतिरिक्त निर्माण की अनुमति दी जाएगी—

  • आईजीबीसी गोल्ड / गृह 4 स्टार / एलईईडी गोल्ड:
    3% अतिरिक्त एफएआर
  • आईजीबीसी प्लैटिनम / गृह 5 स्टार / एलईईडी प्लैटिनम:
    5% अतिरिक्त एफएआर

रेटिंग भारतीय ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC), गृह (GRIHA), एलईईडी (LEED) या किसी अन्य समकक्ष मान्यता प्राप्त संस्था के प्रमाणपत्र के आधार पर मिलेगी। हालांकि, एक से अधिक सर्टिफिकेशन होने पर भी अतिरिक्त एफएआर का लाभ केवल एक बार ही मिलेगा।


किन शर्तों पर मिलेगा लाभ

संशोधन के मुताबिक, वही भवन अतिरिक्त एफएआर के पात्र होंगे जिनमें—

  • ऊर्जा दक्ष डिजाइन और तकनीक
  • पानी की बचत, वर्षा जल संचयन और रीसाइक्लिंग
  • ग्रीन कवर और प्रदूषण नियंत्रण
  • कम अपशिष्ट और पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री
  • प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन की व्यवस्था

जैसे प्रावधान वास्तव में लागू किए गए हों।

यदि निर्माण पूर्ण होने के बाद ग्रीन मानदंड पूरे नहीं होते, तो दिया गया अतिरिक्त एफएआर स्वतः निरस्त हो जाएगा।


बिल्डिंग परमिशन के समय देनी होगी घोषणा

नई व्यवस्था के तहत—

  • भवन अनुमति लेते समय यह बताना अनिवार्य होगा कि किस ग्रीन सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया जा रहा है
  • उतने ही अतिरिक्त एफएआर का उपयोग किया जा सकेगा, जितना घोषित किया गया हो।
  • बाद में इसमें कोई संशोधन या वृद्धि नहीं हो सकेगी
  • यदि तय सर्टिफिकेशन नहीं मिला, तो अतिरिक्त निर्माण पर निर्धारित कम्पाउंडिंग शुल्क देना होगा।

ईसीएसबीसी और ईएनएस का पालन अनिवार्य

अतिरिक्त एफएआर का प्रोत्साहन उन्हीं भवनों को मिलेगा जो—

  • नई ऊर्जा संरक्षण और सतत भवन संहिता (ECSBC)
  • ईको निवास संहिता (ENS)
    के अनुरूप निर्मित और प्रमाणित हों।

राहत भी, जिम्मेदारी भी

सरकार के इस फैसले से—

  • ऊर्जा खपत में कमी
  • पानी की बचत
  • बेहतर वायु गुणवत्ता
  • कार्बन फुटप्रिंट में गिरावट

जैसे पर्यावरणीय लाभ होंगे।
वहीं बिल्डरों के लिए यह फैसला राहत भी है और जिम्मेदारी भी—राहत इसलिए कि अतिरिक्त एफएआर से परियोजना की व्यवहारिकता बढ़ेगी, और जिम्मेदारी इसलिए कि ग्रीन मानकों से समझौता नहीं किया जा सकेगा।


घनी आबादी वाले शहरों को मिलेगा फायदा

भोपाल, इंदौर जैसे घनी आबादी वाले शहरों में अब पर्यावरण का ध्यान रखते हुए अतिरिक्त निर्माण संभव हो सकेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम सतत विकास की दिशा में प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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