अर्थी सजाई, भाई ने दी मुखाग्नि; श्मशान तक निकली शवयात्रा
Drnewsindia विदिशा | शहर में शुक्रवार को सामाजिक रूढ़ियों और जातिगत सोच का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया। दूसरी जाति के युवक से प्रेम विवाह करने पर एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी को समाज और परिवार से “मृत” घोषित करते हुए उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया। यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
घर के बाहर सजाई गई अर्थी
शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे रामबाबू के घर के बाहर अचानक अर्थी सजाई गई। मोहल्ले के लोगों को लगा कि परिवार में किसी की मौत हो गई है। देखते ही देखते रिश्तेदार और पड़ोसी जमा हो गए। लेकिन जब पता चला कि यह अर्थी किसी मृत व्यक्ति की नहीं, बल्कि परिवार की जिंदा बेटी की है, तो लोग स्तब्ध रह गए। कई लोगों ने इसका विरोध किया, तो कुछ की आंखें नम हो गईं।
पुतले पर किया गया अंतिम संस्कार
परिजनों ने बेटी के बिस्तरों और कपड़ों से एक पुतला बनाया और उसे अर्थी पर लिटाया। ढपले बजते रहे, मां-बाप रोते-बिलखते रहे। छोटा भाई सौरभ हाथ में हांडी लेकर खड़ा रहा। “राम नाम सत्य है” के नारों के साथ शवयात्रा शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए श्मशान घाट पहुंची।
श्मशान घाट में पिंडदान किया गया और पुतले को चिता पर लिटाकर मुखाग्नि दी गई। मुखाग्नि देने वाले भाई सौरभ ने कहा कि “बहन अब हमारे लिए मर चुकी है।” परिजनों ने 13 दिन बाद कच्ची और पक्की रसोई करने की बात भी कही।
बेटी की निशानियां भी त्यागीं
परिवार के सदस्य राजेश बेटी के कपड़ों की पोटली लेकर श्मशान पहुंचे और वहां उसे फेंक दिया। उन्होंने कहा कि अब घर में उसकी कोई भी निशानी नहीं रखना चाहते। मां रामश्री ने भावुक होकर कहा कि बेटी को बहुत प्यार से पाला था, लेकिन उसने समाज के खिलाफ जाकर शादी कर ली, इसलिए अब उससे कोई रिश्ता नहीं।
पिता रामबाबू का कहना है कि बेटी के फैसले से समाज में उन्हें बोलने लायक नहीं छोड़ा, इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
पुलिस बोली: दोनों बालिग, अपनी मर्जी से की शादी
थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि युवक और युवती दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से शादी की है। परिजनों को यह रिश्ता स्वीकार नहीं था, इसलिए उन्होंने बेटी को त्याग दिया। गुमशुदगी की रिपोर्ट के आधार पर युवती को दस्तयाब कर परिजनों को सौंपा गया था।




