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सीहोर / जिले के ग्राम पाटनी में बीती रात कुदरत का कहर टूटा। यहाँ भीषण आग लगने से दो सगे परिवारों के सिर से छत छिन गई। इरफान और इकबाल के मकानों में लगी इस आग ने न केवल उनके घर जलाए, बल्कि जीवन भर की जमा-पूंजी भी राख कर दी।
तबाही का मंजर: क्या-क्या जला?
आग इतनी भीषण थी कि ग्रामीणों की तमाम कोशिशों के बावजूद इसे बुझाया नहीं जा सका। नुकसान का आकलन दिल दहला देने वाला है:
- मकान: इरफान के 10 कमरे और इकबाल के 6 कमरे पूरी तरह नष्ट।
- नकदी व जेवर: 5 लाख रुपए कैश, 4 किलो चांदी और 6 तोला सोना आग की भेंट चढ़ा।
- फसल का नुकसान: किसान परिवार की मेहनत से उगी 40 कट्टी लहसुन (कीमत ₹3 लाख), 25 क्विंटल गेहूं और 5 क्विंटल चना जल गया।
- घरेलू सामान: फ्रिज, कूलर, वॉशिंग मशीन, सोफा, टीवी और पलंग जैसे सभी उपकरण राख हो गए।
कुल अनुमानित नुकसान: लगभग 25 लाख रुपए।
मिसाल: जब पूरा गांव बना ‘परिवार’
इस दुखद घड़ी में ग्राम पाटनी के लोगों ने मानवता की बड़ी मिसाल पेश की है। घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर पीड़ितों की मदद का बीड़ा उठाया:
- तत्काल सहायता: 26 ग्रामीणों ने मिलकर 16,010 रुपए का चंदा इकट्ठा किया और पीड़ित इकबाल को सौंपा।
- मदद की अपील: ग्रामीणों ने क्षेत्र के अन्य किसानों और सक्षम लोगों से आह्वान किया है कि वे इन परिवारों को फिर से खड़ा करने में अपना योगदान दें।
- एकजुटता: ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल दो परिवारों की नहीं, पूरे गांव की क्षति है और वे शासन-प्रशासन से भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन से उम्मीद
यह मामला जन-सहयोग की एक अनूठी मिसाल बन गया है, जहाँ संकट के समय गांव वालों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद हाथ आगे बढ़ाए। अब सबकी नजरें प्रशासन पर हैं कि पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द सरकारी राहत राशि प्रदान की जाए।




