Drnewsindia.com/भोपाल।
मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कैबिनेट का विस्तार खरमास के बाद, यानी जनवरी के दूसरे पखवाड़े में होने की पूरी संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस विस्तार में 3 से 4 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि 6 से 8 नए विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। यह पूरा फेरबदल पूरी तरह परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर आधारित होगा।
परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनी आधार
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में भोपाल और खजुराहो में मंत्रियों के विभागों की गहन समीक्षा की थी। इसी समीक्षा के आधार पर मंत्रियों की रेटिंग तय की गई, जिसे केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया है।
सूत्रों का कहना है कि जिन मंत्रियों की दो साल की परफॉर्मेंस कमजोर रही है या जिनकी वजह से सरकार और संगठन की छवि प्रभावित हुई है, उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
खाली पद और संभावित इस्तीफे
वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित 31 सदस्य मोहन यादव मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं। विधानसभा सदस्यों की संख्या के अनुपात में प्रदेश में 35 मंत्री हो सकते हैं। ऐसे में 4 पद पहले से खाली हैं और 4 मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफे लिए जाने की भी चर्चा है। इनमें से कुछ राज्यमंत्री को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
वरिष्ठ विधायकों को मिल सकता है मौका
सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों के चयन में उन विधायकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका अपने क्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर रहा है और जिन्होंने केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया है।
इसके साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
15 जनवरी से पहले होगा अंतिम फैसला
केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि 15 जनवरी से पहले अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा। इसके बाद मंत्रियों के विभागों और जिलों के प्रभार में भी बदलाव किया जाएगा।
संगठन में भी हो सकते हैं बड़े फैसले
भाजपा संगठन में हालिया नियुक्तियों के बाद संकेत हैं कि कुछ राज्यों में सरकार और संगठन स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। चर्चा है कि मध्यप्रदेश के कुछ वरिष्ठ नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देकर मंत्रिपद से हटाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, मोहन यादव सरकार अगले तीन वर्षों के विकास एजेंडे को ध्यान में रखते हुए अब केवल परफॉर्मेंस के आधार पर ही मंत्रियों को मौका देने के मूड में नजर आ रही है।




