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मध्यप्रदेश / के मंदसौर में 18 वर्षीय छात्र सोहनलाल की गिरफ्तारी ने प्रदेश के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। यह केस केवल 2.7 किलो अफीम की तस्करी का नहीं रह गया, बल्कि यह “कानून बनाम प्रक्रिया” की एक ऐसी मिसाल बन गया है जिसने हाईकोर्ट को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
1. अपराध का सच: ठोस सबूतों के घेरे में सोहनलाल
पुलिस की जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने सोहनलाल की संलिप्तता को स्पष्ट कर दिया है:
- नेटवर्क: आरोपी छात्र कूरियर बॉय के तौर पर काम कर रहा था। उसके मोबाइल से सप्लायर विकास चौधरी और चंद्रप्रकाश पाटीदार के बीच 500 से अधिक कॉल का रिकॉर्ड मिला है।
- सीसीटीवी फुटेज: फुटेज में नीली टी-शर्ट पहने सप्लायर चंद्रप्रकाश और सोहनलाल के बीच इशारों में बातचीत और डिलीवरी की पुष्टि हुई है।
- पुराना रिकॉर्ड: जांच में खुलासा हुआ कि युवक पहली बार नहीं, बल्कि 6-7 बार पहले भी मंदसौर तस्करी के लिए आ चुका था।
2. पुलिस की ‘झूठी’ FIR: जहाँ से बिगड़ा मामला
तस्करी के सबूत होने के बावजूद, पुलिस ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में जो ‘शॉर्टकट’ अपनाया, वही उनके गले की फांस बन गया।
| वास्तविक घटना (वीडियो के अनुसार) | पुलिस का आधिकारिक रिकॉर्ड (FIR) |
| 29 अगस्त: बस रोककर सोहनलाल को सादी वर्दी में उतारा गया। | FIR: आरोपी को बांडा खाल चौराहा स्थित श्मशान के पास से पकड़ा गया। |
| साक्ष्य: सीसीटीवी और वायरल वीडियो। | तर्क: यात्रियों को परेशानी न हो, इसलिए स्थल बदला गया। |
3. हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “कानून से खिलवाड़ मंजूर नहीं”
6 दिसंबर को जब परिजनों ने गिरफ्तारी का वीडियो कोर्ट में पेश किया, तो हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली को ‘सिस्टम फेल्योर’ करार दिया।
- न्यायालय का रुख: कोर्ट ने कहा कि आरोपी भले ही दोषी हो, लेकिन पुलिस को सच छिपाने या झूठे रिकॉर्ड बनाने का अधिकार नहीं है।
- एक्शन: हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद थाना प्रभारी समेत 6 पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया।
“यह किसी एक अधिकारी की गलती नहीं, बल्कि पूरे थाने की कार्यशैली का दोष है।” — माननीय हाईकोर्ट
4. दोनों पक्षों ने छिपाई सच्चाई?
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कोर्ट ने माना कि दोनों पक्ष पूरी तरह सच्चे नहीं थे:
- पुलिस: गिरफ्तारी की जगह को लेकर झूठ बोला।
- आरोपी पक्ष: दावा किया कि बैग मौके पर नहीं था, जबकि वीडियो में बैग सोहनलाल के पास ही दिखा।
5. महकमे में हलचल: आईजी से एसपी तक जांच में शामिल
मंदसौर एसपी विनोद कुमार मीणा ने स्वयं हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि विभागीय कार्रवाई में तथ्यात्मक त्रुटियां रही हैं। वर्तमान में:
- रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल पूरी जांच की निगरानी कर रहे हैं।
- उज्जैन आईजी उमेश जोगा भी इस मामले पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
- निलंबित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच (DE) शुरू कर दी गई है।




