सीहोर: “अहंकार पैदा करने वाली दौलत का त्याग ही सच्चा सुख है” – संत गोविंद जाने

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सीहोर। शहर के बस स्टैंड स्थित सिंधी कॉलोनी में आयोजित श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा यज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। गोदन सरकार हनुमान मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित इस भव्य कथा में संत श्री गोविंद जाने ने जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिकता पर मार्मिक विचार रखे।

धन और अहंकार पर विशेष प्रवचन

संत श्री गोविंद जाने ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि संपत्ति केवल वही श्रेष्ठ है जो आपको विनम्र बनाए। उन्होंने कहा:

  • जिस दौलत से मन में ‘अहम’ (अहंकार) पैदा हो, उसे तुरंत त्याग देना चाहिए।
  • वैभव केवल धन से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ विचारों और प्रभु स्मरण से आता है।
  • जिसके पास अच्छे विचार और भजन रूपी धन होता है, उसके पास सुखी होने की चाह रखने वालों का मेला लगा रहता है।

सुखी जीवन के सूत्र

कथा के दौरान संत जी ने व्यावहारिक जीवन की सीख देते हुए बताया कि:

  1. धर्मपत्नी की भूमिका: घर में धर्म को धारण करने का मुख्य माध्यम धर्मपत्नी है, जिनके धार्मिक कार्यों से परिवार का विनाश नहीं होता।
  2. वाणी में विनय: हमारी भाषा में विनम्रता होनी चाहिए। छोटी बातों को मन में पालकर द्वेष नहीं बढ़ाना चाहिए।
  3. करुणा और सेवा: सच्चा ‘वैष्णव’ वही है जो स्वयं खाने से पहले गौ माता और किसी गरीब भूखे बच्चे के बारे में सोचे। जब हम दूसरों के प्रति करुणा रखते हैं, तभी हमारे भीतर ‘विष्णु’ जागृत होते हैं।

“हमारे व्यवहार का प्रभाव केवल हम पर नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। इसलिए हमेशा द्वेष भाव छोड़कर दुश्मनों को भी मित्र बनाने की क्षमता रखनी चाहिए।”

— संत गोविंद जाने

कथा का समय और स्थान

आयोजन समिति ने जानकारी दी कि भागवत कथा का यह प्रवाह आगामी 30 दिसंबर तक निरंतर जारी रहेगा।

  • स्थान: सिंधी कॉलोनी स्थित मैदान, सीहोर।
  • समय: प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक।

समिति ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण का लाभ लेने की अपील की है।

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