सीहोर: नानी बाई का मायरा में उमड़ा आस्था का सैलाब, आचार्य त्रिवेदी बोले— “चमत्कार नहीं, भक्ति पर विश्वास करें”

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सीहोर। शहर के छावनी स्थित कुईया गार्डन में आयोजित तीन दिवसीय ‘नानी बाई का मायरा’ का भव्य समापन हुआ। अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी ने भक्ति और धैर्य की ऐसी महिमा बताई कि श्रोता भाव-विभोर हो गए।

चमत्कार बनाम सच्ची भक्ति

आचार्य श्री ने अपने प्रवचनों में स्पष्ट किया कि ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग अलौकिक घटनाओं में नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वास में है। उन्होंने कहा:

  • भक्ति ही आधार है: जहाँ चमत्कार की चाह होती है, वहाँ भक्ति का अभाव होता है। सच्ची श्रद्धा बाहरी साक्ष्यों की मोहताज नहीं होती।
  • भटकाव से बचें: जब कोई केवल चमत्कार तलाशता है, तो उसका ध्यान समर्पण से हटकर अलौकिक घटनाओं पर टिक जाता है, जो आध्यात्मिक मार्ग में बाधा है।
  • कर्म ही पूजा है: भगवान की कृपा पाने के लिए केवल ‘कर्म’ और ‘भक्ति’ के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

धैर्य और सहनशक्ति की सीख

आज के दौर में मनुष्य की घटती सहनशक्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए आचार्य त्रिवेदी ने भक्त नरसी का उदाहरण दिया:

  • विपरीत परिस्थितियाँ: कलयुग में लोग छोटे से दुख से घबराकर जीवन समाप्त करने का विचार करने लगते हैं, लेकिन नरसी जी ने सैकड़ों कष्टों के बाद भी धैर्य नहीं खोया।
  • ईश्वरीय सहायता: नरसी जी के इसी धैर्य और अटूट विश्वास के कारण स्वयं भगवान को धरती पर आकर नानी बाई का करोड़ों का मायरा भरना पड़ा।

“सच्ची भक्ति आंतरिक आस्था पर आधारित होती है। जब आप पूर्ण समर्पण के साथ ईश्वर को पुकारते हैं, तो वे आपकी हर परिस्थिति में साथ खड़े होते हैं।” — आचार्य पंडित संजय कृष्ण त्रिवेदी

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