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भोपाल | राजधानी के पॉलिटेक्निक चौराहा स्थित मानस भवन के पीछे बसी 70 साल पुरानी आदिवासी झुग्गी बस्ती को हटाने की प्रशासन की मुहिम फिलहाल थम गई है। सोमवार को जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा कार्रवाई पर स्थगन (Stay) दिए जाने के बाद रहवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। शाम को बस्ती में ढोल-धमाकों के साथ जश्न मनाया गया और कांग्रेस नेताओं पर फूल बरसाए गए।
प्रशासन का बैकफुट: पुलिस बल की कमी या राजनीतिक दबाव?
सुबह प्रशासन की ओर से 101 अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी टीम अतिक्रमण हटाने के लिए तैयार थी, लेकिन ऐन वक्त पर कार्रवाई स्थगित कर दी गई।

- अधिकारियों का तर्क: शहर वृत्त एसडीएम दीपक पांडे ने बताया कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध न होने के कारण आज की कार्रवाई टाली गई है।
- राजनीतिक माहौल: रविवार को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मौके पर पहुंचकर एडीएम और एसडीएम को चेतावनी दी थी कि “यदि एक भी ईंट हटाई गई, तो पूरी कांग्रेस यहाँ खड़ी मिलेगी।”
हाईकोर्ट का स्टे और बस्ती में जश्न
शाम को जैसे ही हाईकोर्ट से स्टे की खबर बस्ती पहुंची, वहां का नजारा बदल गया। बस्ती के रास्ते पर रातोंरात लगाया गया लोहे का गेट खोल दिया गया। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, पार्षद शबिस्ता जकी और अन्य कांग्रेस नेताओं का रहवासियों ने जोरदार स्वागत किया।
मामला क्या है? (बस्ती का इतिहास और शिफ्टिंग प्लान)
| विवरण | जानकारी |
| बस्ती की उम्र | लगभग 70 साल पुरानी (आदिवासी बहुल) |
| प्रभावित परिवार | 27 झुग्गी परिवार (200 से अधिक लोग) |
| प्रशासन का प्लान | मालीखेड़ी, भौंरी या कलखेड़ा में शिफ्टिंग |
| शिफ्टिंग खर्च | ₹2 लाख प्रति परिवार (मानस भवन प्रबंधन द्वारा देय) |
| विवाद का कारण | रहवासी अपनी पुरानी जगह छोड़ने को तैयार नहीं हैं |
“मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक को बता देना…”
रविवार को मानस भवन में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान जब महिलाएं जीतू पटवारी से मिलीं, तो उन्होंने एडीएम को फोन पर दो-टूक कहा— “ये गरीब आदिवासियों के घर हैं, इन्हें तोड़ोगे तो मैं खुद यहाँ खड़ा मिलूँगा।” इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इस शिफ्टिंग का विरोध कर चुके हैं।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नज़र में
- 25 दिसंबर: एसडीएम ने बेदखली के आदेश जारी किए।
- 28 दिसंबर: पीसीसी चीफ जीतू पटवारी बस्ती पहुंचे और अधिकारियों को चेतावनी दी।
- 29 दिसंबर सुबह: 101 अधिकारियों की ड्यूटी लगी, लेकिन कार्रवाई स्थगित हुई।
- 29 दिसंबर शाम: हाईकोर्ट ने कार्रवाई पर रोक लगाई; बस्ती में फूल बरसाकर जीत मनाई गई।




