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अशोकनगर। शहर में बिना अनुमति कुकुरमुत्ते की तरह उग रहीं अवैध कॉलोनियों के खिलाफ कलेक्टर आदित्य सिंह ने बड़ा एक्शन लिया है। प्रशासन ने ऐसी कॉलोनियों में भू-खंडों (प्लॉट्स) की खरीद-फरोख्त और उनके नामांतरण (Mutation) पर आगामी आदेश तक पूरी तरह रोक लगा दी है।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
एसडीएम अशोकनगर की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि नगरपालिका क्षेत्र में कई रसूखदार कॉलोनाइजर्स बिना नगर निवेश (T&P) और बिना कॉलोनी विकास अनुमति के छोटे-छोटे प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। इसी प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर ने अंतरिम आदेश जारी कर तहसीलदारों को राजस्व रिकॉर्ड में प्रविष्टि दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इन कॉलोनियों के नाम आए सामने (ब्लैक लिस्टेड):
प्रशासनिक जांच में मुख्य रूप से इन प्रोजेक्ट्स में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं:
- लेकसिटी कॉलोनी
- केशर बिहार कॉलोनी
- देव होम्स
- भूमि एसोसिएट
कानून की मार: ‘शून्य’ माना जाएगा प्लॉट का सौदा
कलेक्टर के आदेश में मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 का स्पष्ट हवाला दिया गया है। इसके तहत:
- अवैध कॉलोनी में किया गया कोई भी एग्रीमेंट या रजिस्ट्री शून्य (Void) और अमान्य मानी जाएगी।
- भू-राजस्व संहिता के अन्य प्रावधानों के बावजूद, ऐसी जमीनों का नामांतरण नहीं किया जा सकेगा।
- अवैध कॉलोनी का निर्माण और भूमि का डायवर्जन न कराना एक दंडनीय अपराध है।
आम जनता के लिए जरूरी चेतावनी
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अपनी मेहनत की कमाई किसी भी प्लॉट में फंसाने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति की जांच जरूर करें।
“बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नक्शा अनुमोदन और वैध रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन के किसी भी कॉलोनी में निवेश न करें, अन्यथा भविष्य में आपको कानूनी और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।”
Highlights: खबर एक नजर में
- बड़ा एक्शन: कलेक्टर ने अवैध कॉलोनियों के नामांतरण पर लगाई अंतरिम रोक।
- अमान्य सौदे: धारा 339 के तहत अवैध कॉलोनियों की रजिस्ट्री अब सिर्फ रद्दी का टुकड़ा।
- रडार पर: लेकसिटी, केशर बिहार, देव होम्स और भूमि एसोसिएट जैसी कॉलोनियां जांच के घेरे में।
- जनहित में जारी: प्लॉट खरीदने से पहले रेवेन्यू रिकॉर्ड और विकास अनुमति की जांच अनिवार्य।




