राजगढ़: “चांद हमारा मामा, हरा रंग हमारी प्रकृति… अब टोपीवालों को कुछ नहीं देंगे”, छापीहेड़ा में साध्वी रंजना की हुंकार

0
17

Drnewsindia

राजगढ़ (छापीहेड़ा)। श्री रामलला प्राण-प्रतिष्ठा की वर्षगांठ पर बुधवार को छापीहेड़ा की धरती भगवा रंग में रंग गई। विराट हिंदू सम्मेलन में उमड़े 20 हजार से ज्यादा जनसैलाब के बीच भोपाल से आईं साध्वी रंजना दीदी ने अपने ओजस्वी और तीखे संबोधन से हिंदुत्व का शंखनाद किया। मंच पर पंडित प्रदीप मिश्रा समेत कई दिग्गज संतों की मौजूदगी में साध्वी ने धर्मांतरण, लव जिहाद और जातिवाद पर कड़ा प्रहार किया।

“सनातन को मिटाने वाले खुद कब्रों में दफन हो गए”

साध्वी रंजना ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय श्री राम’ के नारों से की और विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा:

“जो सनातन लंकेश की हुंकार और कंस की तलवार से नहीं मिटा, वो इन कठमुल्लों की आवाज से क्या मिटेगा? टोपीवाले प्रयास करते-करते कब्रों में दफन हो गए, लेकिन सनातन आज भी अजेय है।”

चांद, शुक्रवार और हरा रंग… अब सब हमारा!

साध्वी ने हिंदुओं से अपील की कि वे अपनी प्रतीकों और परंपराओं पर अपना हक वापस मांगें:

  • हरा रंग: “लोग कहते हैं हरा रंग उनका है, लेकिन हरा रंग तो हमारी प्रकृति का है। आज से संकल्प लो कि हरा रंग हम उन्हें नहीं देंगे।”
  • शुक्रवार: “शुक्रवार हमारी मां लक्ष्मी का दिन है, यह उनका कैसे हो सकता है?”
  • चांद: “चंदा हमारा मामा है, टोपीवालों को अब चांद भी नहीं देंगे।”

बुर्के में कैद महिलाओं को दिया सनातन का न्योता

धर्मांतरण और महिलाओं की स्थिति पर बोलते हुए साध्वी ने कहा कि जो माताएं-बहनें बुर्के में कैद हैं, उनका सनातन धर्म बाहें फैलाकर स्वागत करता है। उन्होंने कहा, “सनातन में आने पर आपको तीन तलाक से मुक्ति और नारी का असली सम्मान मिलेगा।”

“बंटेंगे तो कटेंगे और घटेंगे भी”

बांग्लादेश और पाकिस्तान के हालातों का जिक्र करते हुए साध्वी रंजना ने एकजुटता का मंत्र दिया:

  1. एकजुटता: “जाति और संप्रदाय के नाम पर बंटना बंद करो। अगर हम बंटे, तो कटेंगे और घटेंगे भी।”
  2. जागने का वक्त: “बांग्लादेश में बेटियों को जलाया जा रहा है। अगर भारत का हिंदू अब भी नहीं जागा, तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा।”
  3. नववर्ष पर नसीहत: उन्होंने 25 दिसंबर और अंग्रेजी नए साल को मानने के बजाय गुड़ी पड़वा पर हिंदू नववर्ष मनाने का संकल्प दिलाया।

विराट सम्मेलन के मुख्य अंश:

  • भीड़: 20,000 से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति।
  • दिग्गज उपस्थिति: सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा और अन्य साधु-संतों का सानिध्य।
  • संदेश: ऊंच-नीच और जाति-पाति के भेद को समाप्त कर ‘हिंदू राष्ट्र’ की संकल्पना।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here