MP Electricity News: अब ‘घिसे-पिटे’ तारों और मशीनों का खर्च भी भरेंगे उपभोक्ता! बिजली कंपनियों ने मांगा 10% से ज्यादा टैरिफ हाइक

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भोपाल | Drnewsindia

मध्यप्रदेश के एक करोड़ 29 लाख घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर एक बार फिर ‘करंट’ लगने वाला है। प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों ने अपनी नाकामी और पुराने घाटे का बोझ आम जनता पर डालने की तैयारी कर ली है। कंपनियों ने मप्र विद्युत नियामक आयोग के सामने जो प्रस्ताव पेश किया है, वह चौंकाने वाला है।

हैरान करने वाला तर्क: ‘डिप्रिसिएशन ऑफ एसेट्स’ का बोझ

बिजली कंपनियों ने अपने पुराने हो चुके तार, केबल और मशीनों के घिसने-पिटने का खर्च (Depreciation) भी उपभोक्ताओं से वसूलने की मांग की है।

  • खर्च का दावा: 1,190 करोड़ रुपये।
  • असर: यदि आयोग ने इसे माना, तो हर महीने के बिल में सीधे 2% की बढ़ोतरी हो सकती है।

कंपनियों का ‘घाटे का गणित’ और प्रस्ताव

कंपनियों ने साल 2026-27 के लिए 6,044 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए 10.19% टैरिफ हाइक का प्रस्ताव रखा है।

मांग का मुख्य आधारअनुमानित राशि
कुल जरूरत (Revenue Requirement)₹ 65,374 करोड़
पुराना ट्रू-अप (2024-25)₹ 4,365 करोड़
स्मार्ट मीटर का खर्च₹ 820 करोड़
बिजली खरीदी का अतिरिक्त व्यय₹ 3,451 करोड़

जानकारों का सवाल: जब लागत घटी तो दाम क्यों बढ़े?

बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का तर्क है कि कंपनियों का प्रस्ताव आधारहीन है:

  1. GST में राहत: कोयले पर लगने वाला जीएसटी सरचार्ज समाप्त हो चुका है (लगभग 400 रुपये प्रति 1000 किलो), लेकिन इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं दिया गया।
  2. सस्ती सौर ऊर्जा: प्रदेश में सौर ऊर्जा क्षमता 5,781 मेगावाट हो गई है, जो 3 रुपये प्रति यूनिट से कम पर मिल रही है। फिर भी लागत बढ़ने का दावा संदिग्ध है।
  3. स्मार्ट मीटर का वादा: दावा था कि स्मार्ट मीटर से चोरी रुकेगी और लागत घटेगी, लेकिन अब इसका खर्च (820 करोड़) भी जनता पर डाला जा रहा है।

चुनावी दांव और खाली खजाना

विधानसभा चुनाव के दौरान 4,800 करोड़ रुपये की वसूली स्थगित की गई थी। अब इसकी भरपाई के लिए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में समिति बनी है, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ना तय है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का दावा है कि 2028 तक दाम नहीं बढ़ेंगे, लेकिन कंपनियों की याचिका इसके ठीक उलट है।

महत्वपूर्ण तारीखें (जनसुनवाई):

  • 25 जनवरी 2026: आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि।
  • 24 फरवरी: जबलपुर क्षेत्र की सुनवाई।
  • 25 फरवरी: इंदौर क्षेत्र की सुनवाई।
  • 26 फरवरी: भोपाल क्षेत्र की सुनवाई।

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