Drnewsindia /भोपाल | मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों क्रिकेट का एक बिल्कुल अलग और सांस्कृतिक रंग देखने को मिल रहा है। शहर के अंकुर खेल मैदान में शुरू हुए इस अनूठे क्रिकेट टूर्नामेंट ने खेल को भारतीय परंपरा और संस्कृति से जोड़ दिया है। प्रतियोगिता की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुई, जिसने माहौल को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
धोती-कुर्ता, तिलक और पुष्पवर्षा के बीच क्रिकेट

मैदान पर उतरते ही धोती-कुर्ता पहने और माथे पर तिलक लगाए खिलाड़ी जब पिच पर पहुंचे, तो ‘जय श्री राम’ के जयघोष से पूरा मैदान गूंज उठा। खिलाड़ियों का स्वागत पुष्पवर्षा के साथ किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में खेलते बल्लेबाज (वल्लक:) और गेंदबाज (गेंदक:) दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
चौका बना ‘चतुष्कम्’, छक्का हुआ ‘षठकम्’
इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संस्कृत कमेंट्री है। जैसे ही कोई खिलाड़ी चौका लगाता है, कमेंटेटर की आवाज गूंजती है— ‘चतुष्कम्!’ और छक्का लगते ही सुनाई देता है— ‘षठकम्!’। आउट, रन, वाइड और नो-बॉल जैसी हर घोषणा भी संस्कृत भाषा में की जा रही है, जिसे सुनकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो रहे हैं।

संस्कृति और खेल का अद्भुत संगम
इस अनूठे आयोजन का आयोजन परशुराम कल्याण बोर्ड और वैदिक ब्राह्मण युवा खेल कल्याण समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। आयोजकों का कहना है कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य क्रिकेट के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा और परंपराओं को युवाओं से जोड़ना है।
आयोजकों का दावा
आयोजकों के अनुसार, इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाले सभी खिलाड़ी पारंपरिक भारतीय परिधान में ही खेल रहे हैं। मैदान पर अंपायर के फैसले, स्कोर की जानकारी और कमेंट्री तक पूरी तरह संस्कृत में दी जा रही है, जो इसे देश का संभवतः पहला ऐसा क्रिकेट टूर्नामेंट बनाती है।




