सीहोर के तीन गांवों में बाघ-तेंदुए का आतंक, ग्रामीणों का रतजगा; वन विभाग को नहीं मिल रहे वन्यजीव

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Drnewsindiaसीहोर। सीहोर जिले के सिराडी, निलबड और कुशलपुरा गांवों में बाघ और तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों और किसानों में दहशत का माहौल बना हुआ है। लगातार वन्यजीव दिखाई देने की सूचनाओं के बाद लोग अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए रातभर खेतों और गांव में जागकर पहरा दे रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि दिन ढलते ही डर और बढ़ जाता है। अपनी सुरक्षा के लिए लोग खेतों में आग जलाकर रख रहे हैं, हाथों में डंडे लेकर पहरा दे रहे हैं और पटाखे फोड़कर बाघ व तेंदुए को भगाने की कोशिश कर रहे हैं। कई ग्रामीणों ने मोबाइल से वन्यजीवों के वीडियो भी बनाए हैं, जो उनकी मौजूदगी की पुष्टि करते हैं।

तीन दिन से सर्चिंग, फिर भी नहीं मिला बाघ-तेंदुआ

वन विभाग की टीम पिछले तीन दिनों से लगातार इलाके में सर्चिंग कर रही है, लेकिन अब तक बाघ या तेंदुआ पकड़ में नहीं आ सका है। ग्रामीणों से जैसे ही सूचना मिलती है, टीम मौके पर पहुंचती है, लेकिन तब तक वन्यजीव स्थान बदल चुके होते हैं। इससे ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है।

बड़ा वन क्षेत्र, सीमित संसाधन

वन विभाग के अनुसार, सीहोर जिले में करीब 1 लाख 36 हजार हेक्टेयर में जंगल फैला हुआ है। जिले में सात वन रेंज और 190 बीट हैं, जबकि विभाग के पास लगभग 200 कर्मचारी ही तैनात हैं। इतने बड़े क्षेत्र में निगरानी रखना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

जिले में 20 बाघ और 420 तेंदुए

वन विभाग का दावा है कि सीहोर जिले में करीब 20 बाघ और 420 तेंदुए मौजूद हैं। इनका आबादी वाले क्षेत्रों में आना चिंता का विषय बनता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से अहमदपुर और इछावर क्षेत्र में भी बाघ और तेंदुए दिखने की लगातार सूचनाएं मिल रही हैं।

कड़ाके की ठंड के बावजूद ग्रामीण और किसान रातभर खेतों में रतजगा करने को मजबूर हैं। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर खुद ही सुरक्षा के इंतजाम कर रहे हैं, क्योंकि अब तक वन विभाग हालात पर पूरी तरह काबू नहीं पा सका है।

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