रायसेन: “संस्कार ऐसे दें कि संतान अधर्म के आगे न झुके”, हिंदू सम्मेलन में साध्वी सरस्वती का हुंकार

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Drnewsindia

रायसेन। शहर के मुखर्जी नगर स्थित नमो पार्क और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी शनिवार को भगवा रंग में रंगी नजर आई। अवसर था विशाल हिंदू सम्मेलन का, जहाँ प्रखर कथावाचक साध्वी सरस्वती ने मुख्य वक्ता के रूप में शिरकत की। अपने ओजस्वी संबोधन में उन्होंने सनातन संस्कृति, राष्ट्रवाद और मातृशक्ति की भूमिका पर बेबाक विचार रखे।

‘साधु और संघ’ एक समान: सनातन के रक्षक

सम्मेलन को संबोधित करते हुए साध्वी सरस्वती ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तुलना साधुओं से की। उन्होंने कहा:

“आरएसएस और साधु समाज एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों का एकमात्र लक्ष्य सनातन संस्कृति की रक्षा करना और समाज में वैचारिक जागृति लाना है।”

भव्य स्वागत: पुष्प वर्षा और जयकारों से गूंजा शहर

कार्यक्रम से पूर्व शहर में भव्य कलश यात्राएं निकाली गईं। जैसे ही साध्वी सरस्वती मुखर्जी बस्ती पहुंचीं, श्रद्धालुओं ने उन पर फूलों की वर्षा कर स्वागत किया। पूरा पंडाल ‘भारत माता की जय’ और ‘जय श्री राम’ के नारों से गुंजायमान रहा।

संबोधन की मुख्य बातें:

साध्वी सरस्वती ने अपने भाषण में कई गंभीर विषयों पर समाज का मार्गदर्शन किया:

  • जीवन का उद्देश्य: उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य केवल भोजन और परिवार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि धर्म को आगे बढ़ाना ही असली उद्देश्य है।
  • वीर सपूतों के संस्कार: माताओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को शिवाजी महाराज, रानी लक्ष्मीबाई और भगत सिंह जैसे महापुरुषों की गाथाएं सुनाएं। संस्कारित बच्चे ही अधर्मियों का सामना कर पाएंगे।
  • राष्ट्र रक्षा: संघ की शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब समाज संगठित होता है, तो पाकिस्तान जैसी दुश्मन ताकतों की धमकियों का डर खत्म हो जाता है।
  • नशा मुक्ति का संकल्प: उन्होंने युवाओं से नशे और बुरे कर्मों का त्याग कर ‘नशा मुक्त भारत’ बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।


आयोजन के मुख्य बिंदु

श्रेणीविवरण
स्थाननमो पार्क (मुखर्जी नगर) एवं हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, रायसेन
मुख्य वक्तासाध्वी सरस्वती
प्रमुख संदेशनशा मुक्ति, सनातन धर्म का प्रचार, वीरता के संस्कार
विशेष आकर्षणभव्य कलश यात्रा और पुष्प वर्षा

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