MP Politics: मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का काउंटडाउन शुरू, दिल्ली से मिली ‘हरी झंडी’ – जानें किन दिग्गजों को मिलेगी जगह

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भाजपा नेताओं का इंतजार खत्म! लिस्ट तैयार…निगम-मंडल और आयोगों में नियुक्ति जल्द

Drnewsindia/भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार में लंबे समय से प्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता अब साफ हो गया है। संगठन और सरकार के बीच लंबी खींचतान और मंथन के बाद सूचियाँ लगभग तैयार हैं। दिल्ली आलाकमान के दबाव और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भांपते हुए भाजपा अब जल्द ही निगम-मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में ताजपोशी करने जा रही है।

फरवरी में आएगी पहली खेप: एक दर्जन से ज्यादा निगम-मंडलों पर नजर

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के हालिया रतलाम दौरे के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि “लिस्ट ट्विस्ट” हो चुकी है और कभी भी जारी हो सकती है। सूत्रों की मानें तो फरवरी माह में पहली सूची आएगी, जिसमें प्रदेश के एक दर्जन से अधिक बड़े निगम-मंडलों और प्राधिकरणों (जैसे BDA और IDA) के अध्यक्षों के नाम होंगे।

इन दिग्गजों के नाम ‘लगभग’ तय (संभावित सूची)

सरकार उन विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को साधने की कोशिश कर रही है, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई थी।

प्रमुख दावेदार और संभावित पद:

  • चेतन सिंह: भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) की जिम्मेदारी मिल सकती है।
  • हरिनारायण सिंह: इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के प्रबल दावेदार।
  • विधायक कोटे से: शैलेंद्र कुमार जैन, प्रदीप लारिया, अजय बिश्नोई और अर्चना चिटनीस जैसे कद्दावर नाम दौड़ में सबसे आगे हैं।
  • अन्य प्रमुख नाम: अरविंद भदौरिया, अंचल सोनकर, कमल पटेल, उमाशंकर गुप्ता, ध्रुव नारायण सिंह, लोकेंद्र पाराशर और गौरव सिरोठिया।

बड़ी खबर: पूर्व मंत्री रामनिवास रावत ने फिलहाल निगम-मंडल में जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है। माना जा रहा है कि विजयपुर उपचुनाव से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया के चलते उन्होंने यह फैसला लिया है।


नियुक्तियों का गणित: एक नजर में

क्षेत्रनियुक्तियां कहाँ होंगी?
बड़े संस्थाननिगम, मंडल, प्राधिकरण और आयोग
स्थानीय निकायएल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति
शिक्षा क्षेत्रकॉलेजों की जनभागीदारी समितियां
संगठनखाली होने वाले पदों पर नए चेहरों की एंट्री

क्यों जरूरी है ये नियुक्तियां?

  1. कार्यकर्ताओं का संतोष: सरकार बने 2 साल और निकाय चुनावों को 3 साल बीत चुके हैं। पद न मिलने से कार्यकर्ताओं में मायूसी है।
  2. क्षेत्रीय संतुलन: आगामी चुनावों को देखते हुए जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को साधना अनिवार्य है।
  3. संगठन में कसावट: जो नेता संगठन में पद छोड़ेंगे, उनकी जगह नई ऊर्जा वाले चेहरों को मौका दिया जाएगा।

सत्ता और संगठन का ‘चोली-दामन’ का साथ

रतलाम में हेमंत खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि सत्ता और संगठन मिलकर काम कर रहे हैं। दिल्ली से संकेत साफ है कि अगर अब नियुक्तियों में देरी हुई, तो जमीनी स्तर पर पार्टी को नुकसान हो सकता है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री निवास और प्रदेश कार्यालय पर टिकी हैं, जहाँ से किसी भी वक्त नियुक्तियों का आदेश जारी हो सकता है।


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