Drnewsindia/भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रेलवे की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर सम्मान स्वरूप दिए जाने वाले “चांदी के सिक्के” असल में नकली निकले। जांच में खुलासा हुआ कि इन सिक्कों में चांदी नाम मात्र की थी और ज्यादातर हिस्सा तांबे का था। यह खेल करीब तीन साल से चल रहा था।
99.9% की जगह सिर्फ 0.23% चांदी
पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को विदाई समारोह में चांदी का सिक्का दिया जाता था। लेकिन जब एक कर्मचारी ने सिक्के की शुद्धता को लेकर जौहरी से जांच करवाई, तो सच्चाई सामने आ गई। रिपोर्ट में पाया गया कि सिक्के में सिर्फ 0.23% चांदी है, जबकि नियमानुसार इसमें 99.9% शुद्ध चांदी होनी चाहिए थी। बाकी हिस्सा तांबा निकला।
3640 सिक्कों का ऑर्डर, सालों से चल रही थी सप्लाई
रेलवे विजिलेंस की जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। रेलवे ने इंदौर की फर्म ‘मेसर्स डायमंड बायबल कंपनी’ को कुल 3640 सिक्कों का ऑर्डर दिया था। इन्हीं सिक्कों को पिछले करीब तीन साल से रिटायर हो रहे कर्मचारियों को सम्मान के रूप में बांटा जा रहा था।
कर्मचारियों के सम्मान से हुआ खिलवाड़

रिटायरमेंट पर दिया जाने वाला यह सिक्का कर्मचारियों के लिए सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत का प्रतीक होता है। लेकिन नकली चांदी के सिक्के देकर उनके सम्मान के साथ सीधा खिलवाड़ किया गया।
दोषी फर्म ब्लैकलिस्ट, रेलवे ने उठाए कड़े कदम
मामला सामने आते ही रेलवे प्रशासन हरकत में आया। दोषी फर्म ‘मेसर्स डायमंड बायबल’ को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस घोटाले में और कौन-कौन जिम्मेदार है।
बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि बिना जांच-पड़ताल के तीन साल तक ये सिक्के कैसे सप्लाई होते रहे। क्या गुणवत्ता जांच में लापरवाही हुई या फिर अंदरखाने कोई मिलीभगत थी?
यह मामला सिर्फ नकली सिक्कों का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है, जो कर्मचारी वर्षों तक सेवा करने के बाद अपने विभाग से उम्मीद करते हैं। अब देखना होगा कि जांच में किन चेहरों से नकाब उठता है।




