सीहोर: कलेक्टर की मैराथन बैठक; कृषि और सहकारिता में जिले ने गाड़े झंडे, रबी लक्ष्य 100% पार

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drnewsindia

सीहोर | 23 जनवरी 2026 कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कृषि, सहकारिता, उद्यानिकी और पशुपालन सहित विभिन्न विभागों की गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल कागजों पर न दिखे, बल्कि धरातल पर किसानों के जीवन में बदलाव लाए।


कृषि विभाग: रिकॉर्ड बुवाई और खाद वितरण

जिले ने रबी सीजन 2025-26 में अपनी कृषि क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया है।

  • बुवाई का रकबा: रबी फसलों का कुल क्षेत्रफल 395.20 हजार हेक्टेयर रहा। गेहूं की बुवाई लक्ष्य से 101% अधिक दर्ज की गई।
  • उर्वरक एवं बीज: 1.73 लाख मीट्रिक टन उर्वरक और 1.09 लाख क्विंटल से अधिक उन्नत बीजों का वितरण किया गया।
  • ई-विकास योजना: जिले के सभी 313 उर्वरक विक्रेता अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जो पारदर्शिता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।

आधुनिक और प्राकृतिक खेती पर ज़ोर

  • नरवाई प्रबंधन: नरवाई जलाने से रोकने के लिए कृषि रथ और अनुदान पर हैप्पी सीडर/सुपर सीडर मशीनें उपलब्ध कराई गईं।
  • प्राकृतिक खेती: जिले में 25 क्लस्टर गठित कर 3125 किसानों को जैविक खेती (जीवामृत और जैविक आदान) का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • सोयाबीन उपार्जन: भावांतर योजना के तहत 1.75 लाख मीट्रिक टन से अधिक सोयाबीन की सफल खरीदी की गई।

सहकारिता: मुनाफे में जिला सहकारी बैंक

सहकारिता विभाग की समीक्षा में जिले की मजबूत वित्तीय स्थिति सामने आई:

  • वार्षिक लाभ: जिला सहकारी बैंक सीहोर 5.57 करोड़ रुपये के वार्षिक लाभ में है।
  • विविधीकरण: अब पैक्स (PACS) केवल ऋण तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जनऔषधि केंद्र, पेट्रोल पंप और कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी काम करेंगे।

मत्स्य एवं उद्यानिकी: आजीविका के नए स्रोत

  • मत्स्य पालन: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में 93% बजट का सफल उपयोग किया गया। मत्स्य बीज उत्पादन लक्ष्य का 90% हिस्सा हासिल कर लिया गया है।
  • उद्यानिकी (Horticulture): पीएमएफएमई योजना के तहत स्थानीय उद्यमियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

⚖️ कलेक्टर के कड़े निर्देश: “लापरवाही बर्दाश्त नहीं”

कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा कि:

  1. हितग्राही की संतुष्टि ही सेवा का असली पैमाना है।
  2. फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत की जाए।
  3. बीज और उर्वरकों की गुणवत्ता से समझौता करने वालों पर सीधे लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई हो।

“कृषि और उससे जुड़े विभाग हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इनका सशक्त क्रियान्वयन ही ग्रामीण विकास की कुंजी है।” — श्री बालागुरू के., कलेक्टर


बैठक में प्रमुख उपस्थिति

बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव, कृषि उप संचालक श्री अशोक कुमार उपाध्याय, उद्यानिकी सहायक संचालक श्री जगदीश मुजाल्दा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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