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‘सोयाबीन का पैसा मिला नहीं, अब गेहूं भी गया’— किसानों ने सीएम मोहन यादव और कृषि मंत्री शिवराज से लगाई न्याय की गुहार
पीलूखेड़ी (सीहोर) | 30 जनवरी, 2026
कुदरत की मार और सिस्टम की बेरुखी के खिलाफ सीहोर जिले के ग्राम पीलूखेड़ी में किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश से बर्बाद हुई गेहूं व चने की फसल के मुआवजे की मांग को लेकर किसान एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में लगातार दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी रहा।
खेतों में ही डाला डेरा, जमकर हुई नारेबाजी
प्रभावित किसानों ने कहीं और जाने के बजाय अपनी आड़ी पड़ी (बर्बाद) फसलों के बीच ही बैठकर धरना दिया। किसानों का कहना है कि तेज आंधी और ओलावृष्टि ने उनकी महीनों की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है।
- नुकसान का मंजर: कई खेतों में गेहूं की बालियां टूटकर बिखर गई हैं, तो कहीं मूसलाधार बारिश ने खड़ी फसल को जमीन पर बिछा दिया है।
- प्रमुख मांग: आरबीसी 6-4 (RBC 6-4) के तहत तत्काल राहत राशि और फसल बीमा का भुगतान।
पुराने जख्म हुए हरे: “बीमा प्रीमियम कटता है, पर पैसा नहीं मिलता”
किसान नेता एमएस मेवाड़ा ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले सोयाबीन की फसल भी बर्बाद हुई थी, लेकिन किसानों को ऊंट के मुंह में जीरे के समान मात्र 5000 रुपये थमा दिए गए।
“केसीसी (KCC) के माध्यम से हर साल बीमा प्रीमियम नियमित रूप से काटा जाता है, लेकिन जब मुआवजे की बारी आती है, तो किसान को दर-दर भटकना पड़ता है।”
पीड़ित किसान की व्यथा: हनुमत सिंह की 8 एकड़ फसल खाक
पीलूखेड़ी के किसान हनुमत सिंह की कहानी इस आपदा की भयावहता का प्रमाण है। उनकी 8 एकड़ भूमि पर लगी गेहूं की पूरी फसल नष्ट हो चुकी है। अब उनके सामने परिवार के भरण-पोषण और कर्ज चुकाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
सरकार से त्वरित सर्वे की मांग
धरने पर बैठे हनुमत सिंह मेवाडा, बद्री प्रसाद, ब्रह्म सिंह, शिवनारायण मीणा और अन्य किसानों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि:
- अधिकारियों को तत्काल प्रभावित खेतों में सर्वे के निर्देश दें।
- बीमा कंपनियों को जवाबदेह ठहराकर मुआवजा राशि जल्द दिलाएं।
- पूर्व की लंबित बीमा राशि का भी तत्काल निराकरण करें।




