रायसेन। मध्यप्रदेश के जिला मुख्यालय रायसेन में रविवार को अध्यापक शिक्षक संवर्ग ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों और सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए एक विशाल विरोध प्रदर्शन किया। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ, मध्यप्रदेश के आह्वान पर जिले भर के सैकड़ों शिक्षक डायट (DIET) परिसर में एकत्रित हुए, जहाँ एक विशाल सभा का आयोजन किया गया। शिक्षकों का यह आक्रोश न केवल उनके वर्तमान वेतनमान को लेकर था, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और विभागीय विसंगतियों के खिलाफ एक संगठित विद्रोह के रूप में उभर कर सामने आया।
सभा के पश्चात, शिक्षकों ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए लगभग 3 किलोमीटर लंबी विशाल रैली निकाली। गगनभेदी नारों और तख्तियों के साथ यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जिससे पूरे शहर का ध्यान शिक्षकों की समस्याओं की ओर आकर्षित हुआ। कलेक्ट्रेट पहुंचकर शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर मनोज उपाध्याय को सौंपा। शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि शासन ने समय रहते उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया, तो यह आंदोलन जिला स्तर से उठकर प्रदेश स्तर पर एक उग्र रूप धारण करेगा।
प्रमुख मांगें और संघर्ष के मुख्य बिंदु
शिक्षकों द्वारा सौंपे गए 21 सूत्रीय ज्ञापन में वित्तीय और सेवा संबंधी मांगों का समावेश है, जिन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में समझा जा सकता है:
- पुरानी पेंशन और वरिष्ठता: शिक्षकों की सबसे बड़ी मांग प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करना है, ताकि उन्हें पुरानी पेंशन (OPS), ग्रेच्युटी और अवकाश नगदीकरण का पूर्ण लाभ मिल सके। उनका तर्क है कि एनपीएस (NPS) उनके बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है।
- आठवां वेतनमान: ज्ञापन में 1 जनवरी 2026 से आठवें वेतनमान को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई है, ताकि बढ़ती महंगाई के दौर में शिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।

- प्रशासनिक एवं सेवा सुधार: शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस की व्यावहारिक कठिनाइयों का विरोध किया है और पदोन्नति के 50 प्रतिशत रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग की है। साथ ही, अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण और स्वैच्छिक स्थानांतरण (Transfer) की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया है।
- सामाजिक सुरक्षा: सभी शिक्षकों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराने और सेवानिवृत्ति की आयु को बढ़ाकर 65 वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है।
- दंडात्मक कार्रवाई का विरोध: तीन संतान वाले कर्मचारियों पर की जा रही प्रशासनिक कार्रवाई को तत्काल समाप्त करने और सितंबर 2022 की हड़ताल अवधि का रुका हुआ वेतन जारी करने की भी पुरजोर मांग की गई।
नेतृत्व और भावी रणनीति
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रांतीय अध्यक्ष भारत पटेल ने शासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षक संवर्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है और अब उनके धैर्य का बांध टूट रहा है। जिला कार्यवाहक अध्यक्ष भंवर सिंह मौर्य और जिलाध्यक्ष तेगबहादुर सिंह राजपूत ने भी संबोधित करते हुए कहा कि जब तक सरकार लिखित में ठोस निर्णय नहीं लेती, यह संघर्ष जारी रहेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में प्रांतीय और क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने एक सुर में आगामी चुनावों और कार्ययोजनाओं में इस असंतोष के प्रतिबिंब की बात कही।




