45 पैसे का निवेश, 10 लाख का हक: ट्रेन हादसे के 5 साल बाद परिवार को मिला न्याय

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मुरैना के रवि कुमार शर्मा की दुखद मृत्यु के बाद, भोपाल उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह मामला हर रेल यात्री के लिए एक बड़ी सीख है कि टिकट बुक करते समय ‘ट्रेवल इंश्योरेंस’ के विकल्प को चुनना कितना अनिवार्य है।

घटनाक्रम और कानूनी लड़ाई

  • अक्टूबर 2020: रवि कुमार शर्मा का मुरैना स्टेशन पर ट्रेन पकड़ते समय पैर फिसलने से निधन हो गया।
  • बीमा कवर: उन्होंने ऑनलाइन टिकट बुक करते समय मात्र 45 पैसे का बीमा लिया था।
  • कंपनी की टालमटोल: बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस ने दस्तावेजों की कमी का बहाना बनाकर क्लेम देने से मना कर दिया था।
  • न्याय की जीत: उपभोक्ता आयोग (बेंच-2) ने इसे ‘सेवा में कमी’ माना और बीमा कंपनी पर भारी जुर्माना लगाया।

आयोग का सख्त आदेश

उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निम्नलिखित भुगतान करने के निर्देश दिए हैं:

  1. ₹10 लाख की मुख्य बीमा राशि (7% वार्षिक ब्याज के साथ)।
  2. ₹10 हजार मानसिक और शारीरिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर।
  3. ₹5 हजार कानूनी कार्रवाई के खर्च के रूप में।
  4. समय पर भुगतान न करने पर ब्याज दर को बढ़ाकर 9% करने का आदेश।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

टिकट बुक करते समय अक्सर लोग Travel Insurance के कॉलम को नजरअंदाज कर देते हैं। अधिवक्ता अरुण सिंह राणा के अनुसार, यह एक क्लिक आपकी अनुपस्थिति में आपके परिवार का सबसे बड़ा वित्तीय सहारा बन सकता है।

सीख: मात्र 45 पैसे बचाना आपके परिवार को भविष्य में लाखों के हक से वंचित कर सकता है। हमेशा बीमा का विकल्प चुनें और नॉमिनी की जानकारी अपडेट रखें।

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