drnewsindia.com
कांकेर | छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के अंतागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले अलनार गांव (अमाबेड़ा इलाका) में धर्मांतरण के विवाद ने उग्र रूप ले लिया है। ग्रामीणों ने धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए तीन परिवारों के 13 सदस्यों को गांव से बाहर निकाल दिया है।
विवाद की मुख्य वजह: धार्मिक अनुष्ठान से दूरी
सूत्रों के अनुसार, गांव में हाल ही में पारंपरिक ‘माता पहुंचानी’ (ग्राम देवी की विदाई) कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। यह बस्तर और आसपास के आदिवासी अंचलों का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है।
- आरोप: गांव के तीन परिवारों ने इस अनुष्ठान में हिस्सा लेने और चंदा देने से इनकार कर दिया।
- ग्रामीणों का दावा: गांव वालों का आरोप है कि इन परिवारों ने अपना मूल धर्म त्याग कर ईसाई धर्म अपना लिया है, जिसके कारण वे गांव की पारंपरिक मान्यताओं और देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं।
13 सदस्य हुए बेघर
ग्रामीणों की नाराजगी इस कदर बढ़ी कि उन्होंने एक बैठक बुलाई और इन परिवारों को गांव से बाहर निकालने का फरमान सुना दिया। इस फैसले के बाद:
- तीन परिवारों के 13 सदस्य (जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं) बेघर हो गए हैं।
- प्रभावित परिवारों ने अपनी सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर प्रशासन से गुहार लगाई है।

प्रशासनिक रुख और तनाव की स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
- सुरक्षा: गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती की जा सकती है ताकि कोई हिंसक झड़प न हो।
- जांच: पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या यह मामला जबरन धर्मांतरण का है या फिर व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता का।
- सुलह की कोशिश: प्रशासन दोनों पक्षों के बीच बातचीत के माध्यम से मामले को सुलझाने और विस्थापित परिवारों को वापस बसाने का प्रयास कर रहा है।
बस्तर में बढ़ता सामाजिक तनाव
पिछले कुछ वर्षों में बस्तर संभाग के कई गांवों में धर्मांतरण को लेकर ग्रामीणों और ईसाई मिशनरियों से प्रभावित परिवारों के बीच टकराव की खबरें बढ़ी हैं। अक्सर ‘सामाजिक बहिष्कार’ जैसे कठोर कदम इन इलाकों में तनाव का बड़ा कारण बनते हैं।





