प्रधानमंत्री ने जनसेवा, करुणा और ‘इंडिया फर्स्ट’ के संकल्प को बताया इसकी आधारशिला
drnewsindia.com/नई दिल्ली | देशवासियों की सेवा के प्रति अपने अटूट संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘नागरिकदेवो भव’ की भावना को भारत की विकास यात्रा की मार्गदर्शक शक्ति बताते हुए जनकल्याण को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ केवल एक स्थान नहीं, बल्कि जनसेवा, कर्तव्य और करुणा के मूल्यों का जीवंत प्रतीक है, जो नागरिकों के कल्याण के प्रति देश की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जनसेवा और राष्ट्र प्रथम का प्रतीक

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘सेवा तीर्थ’ ‘इंडिया फर्स्ट’ (भारत प्रथम) के सिद्धांत के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और समाज के सर्वांगीण विकास के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
प्रधानमंत्री के अनुसार, यह केंद्र लोगों को समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के साथ जनसेवा की संस्कृति को मजबूत करेगा।
सोशल मीडिया पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत की जनता की सेवा करने के संकल्प और ‘नागरिकदेवो भव’ की पावन भावना से प्रेरित होकर ‘सेवा तीर्थ’ राष्ट्र को समर्पित करना उनके लिए सौभाग्य का क्षण है।
उन्होंने अपनी कामना व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल सदैव कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम की भावना का उज्ज्वल प्रतीक बनी रहे तथा लोगों को जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहे।
नई पीढ़ी को प्रेरित करने का उद्देश्य

प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि ‘सेवा तीर्थ’ आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि नागरिकों की भलाई ही देश की वास्तविक शक्ति है और इसी भावना के साथ भारत आगे बढ़ रहा है।
सेवा तीर्थ’ का राष्ट्र को समर्पण जनसेवा आधारित शासन की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिक केंद्रित विकास और सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है




