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सीहोर / मंगलवार को पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री कुबेरेश्वरधाम पहुँचे। मंच पर जब दोनों संतों का मिलन हुआ, तो भक्तों ने ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से उनका स्वागत किया।
- धीरेंद्र शास्त्री का संदेश: उन्होंने पंडित प्रदीप मिश्रा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे सनातन धर्म को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कुबेरेश्वर धाम में कथा सुनने को “परम सौभाग्य” बताया।

सनातन धर्म और शास्त्रों का महत्व
पंडित प्रदीप मिश्रा ने आधुनिक समाज में धर्म और शास्त्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की:
- मोबाइल बनाम शास्त्र: उन्होंने कहा कि लोग मोबाइल और सोशल मीडिया के जाल में फंसकर अपने वेदों और शास्त्रों को भूल रहे हैं और दूसरे धर्मों की पुस्तकें पढ़ रहे हैं।
- वैज्ञानिक आधार: उन्होंने शिवरात्रि और नवरात्रि के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए ‘बटरफ्लाई इफेक्ट’ का उदाहरण दिया—जैसे तितली के पंख फड़फड़ाने से दुनिया पर असर हो सकता है, वैसे ही श्रद्धा से चढ़ाई गई बेलपत्री और जल का फल भी अवश्य मिलता है।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षाएं
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने जीवन प्रबंधन के कई सूत्र दिए:
- संगति का असर: गलत संगत जीवन नष्ट कर देती है, जबकि सुसंगति (अच्छे साथ) से जीवन संवरता है।
- अमर रिश्ता: सांसारिक रिश्ते अस्थायी हैं, लेकिन महादेव के साथ भक्त का रिश्ता जन्मों-जन्मों का है।
- समस्या का समाधान: उन्होंने विश्वास दिलाया कि “एक लोटा जल” जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर करने की शक्ति रखता है।
सामाजिक और सेवा कार्य
- अखण्ड हिन्द फौज का सम्मान: सेवा कार्य में जुटे 500 कैडेटों को पंडित जी ने सम्मानित किया और उन्हें उपहार स्वरूप जैकेट प्रदान की।
- व्यवस्थाएं: धाम पर लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं के लिए भोजन (दाल-रोटी, सब्जी, नुक्ति), चिकित्सा और बैठने की निशुल्क व्यवस्था की गई है।
आगामी विशेष आयोजन
- फुलेरा दूज (गुरुवार): इस अवसर पर मंदिर परिसर में स्थित बाबा की भव्य शिला और रुद्राक्ष शिवलिंग का विशेष श्रृंगार और महाआरती की जाएगी।




