भोपाल: ₹204 करोड़ खर्च, फिर भी इलाज के लिए भटक रहे लोग; तैयार खड़े हैं 5 बड़े अस्पताल, लेकिन ताले खुलना बाकी

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drnewsindia.com

भोपाल: राजधानी भोपाल में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपए बहा दिए गए, लेकिन सिस्टम की सुस्ती और छोटी-छोटी अड़चनों ने आम जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। शहर के पांच प्रमुख स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स पर ₹204 करोड़ से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, इमारतें बनकर तैयार हैं, लेकिन कहीं अतिक्रमण तो कहीं कागजी औपचारिकताओं के कारण ये अस्पताल अब तक शुरू नहीं हो सके हैं।

ये हैं वो 5 बड़े प्रोजेक्ट्स जो ‘डेडलाइन’ फांद चुके हैं

अस्पताल का नामबजट (करोड़ में)वर्तमान स्थितिनई संभावित तारीख
सुल्तानिया सिविल अस्पताल₹120 करोड़फिनिशिंग और टेस्टिंग जारीअगस्त 2026
जेपी अस्पताल (नया भवन)₹32 करोड़STP/ETP का काम बकायामई 2026
बैरागढ़ मेटरनिटी विंग₹22 करोड़हैंडओवर और स्टाफ तैनाती अटकीफरवरी 2026
बैरसिया सिविल अस्पताल₹20 करोड़फिनिशिंग और यूटिलिटी काम बाकीमई 2026
रातीबड़ सामुदायिक केंद्र₹10 करोड़फायर टैंक की जमीन पर अतिक्रमणस्पष्ट नहीं

⚠️ देरी की 3 बड़ी वजहें: बजट बढ़ा, पर सुविधा नहीं

  1. अतिक्रमण और प्रशासनिक सुस्ती: रातीबड़ में अस्पताल का भवन तो तैयार है, लेकिन फायर टैंक और आवासीय परिसर की जमीन पर कब्जा है। सीएमएचओ ने कलेक्टर को पत्र लिखा है, लेकिन जमीन अब तक मुक्त नहीं हो पाई।
  2. लागत में भारी बढ़ोतरी: जेपी अस्पताल का प्रोजेक्ट जो ₹26 करोड़ का था, अब ₹32 करोड़ का हो चुका है। एसटीपी और पुराने भवन से जोड़ने वाले ब्रिज के लिए ₹6 करोड़ अतिरिक्त स्वीकृत किए गए हैं, जिससे डेडलाइन 5वीं बार बढ़ गई है।
  3. हैंडओवर का इंतजार: बैरागढ़ में 100 बेड का आधुनिक मेटरनिटी विंग बनकर तैयार है, लेकिन मरीजों को अभी भी पुराने और जर्जर वार्डों में इलाज कराना पड़ रहा है क्योंकि औपचारिक हैंडओवर की प्रक्रिया लटकी है।

जनता पर सीधा असर: बड़े अस्पतालों पर बढ़ा बोझ

इन अस्पतालों के शुरू न होने का खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ रहा है जो रातीबड़, बैरसिया और बैरागढ़ जैसे इलाकों में रहते हैं।

  • दूरी की मार: स्थानीय स्तर पर इलाज न मिलने से मरीजों को हमीदिया या जेपी अस्पताल की लंबी दौड़ लगानी पड़ती है।
  • भीड़ का दबाव: छोटे केंद्रों के बंद रहने से बड़े अस्पतालों में मरीजों की कतारें लंबी हो रही हैं, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार?

“सुल्तानिया अस्पताल का निर्माण अंतिम चरण में है। रातीबड़ में अतिक्रमण एक बड़ी बाधा है, जिसके लिए कलेक्टर को पत्र लिखा गया है। जमीन मुक्त होते ही हम बिल्डिंग हैंडओवर ले लेंगे। हमारी कोशिश है कि इस साल ये सभी प्रोजेक्ट्स जनता के लिए खोल दिए जाएं।”

— डॉ. मनीष शर्मा, CMHO, भोपाल

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