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बुधनी। मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नर्मदा के आंचल में एक और ऐतिहासिक रहस्य से पर्दा उठना शुरू हो गया है। बुधनी नगर परिषद द्वारा कराई जा रही खुदाई में जोशीपुर के पास एक प्राचीन और सुव्यवस्थित घाट के अवशेष मिले हैं। स्थानीय जानकारों का दावा है कि यह ढांचा करीब 600 साल पुराना है और इसका संबंध मध्यकालीन इतिहास के गौरवशाली पन्नों से है।
🛠️ खुदाई में क्या मिला? (The Discovery)
नगर परिषद की देखरेख में चल रही इस खुदाई ने पुरातत्व प्रेमियों में उत्साह भर दिया है:
- गहराई: अब तक 15 से 20 फीट तक की मिट्टी हटाई जा चुकी है।
- संरचना: खुदाई के दौरान पत्थरों से बनी मजबूत और कलात्मक सीढ़ियां मिली हैं, जो इस घाट की प्राचीन भव्यता को दर्शाती हैं।
- मंत्री की पहल: हाल ही में मंत्री प्रह्लाद पटेल के परिजनों ने यहां का दौरा किया था, जिसके बाद स्थानीय लोगों की मांग पर यह खुदाई शुरू की गई।

🏰 मालवा सल्तनत और ‘होशंग शाह’ का कनेक्शन
स्थानीय बुजुर्गों और इतिहासकारों के अनुसार, इस घाट का गहरा नाता मालवा सल्तनत के सुल्तान होशंग शाह (1405-1435 ई.) से है।
- जनश्रुति: कहा जाता है कि होशंग शाह की पत्नी हिंदू थीं और वे इसी घाट के समीप स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए आती थीं।
- किला: मंदिर के सामने बने प्राचीन किले को राजा के निवास स्थल के रूप में देखा जाता है।

🌀 रहस्यमयी गुफा: हकीकत या किंवदंती?
इस स्थल के साथ एक बेहद रोचक कहानी भी जुड़ी हुई है:
कहा जाता है कि इस मंदिर से लेकर नर्मदापुरम (होशंगाबाद) के किले तक नर्मदा नदी के नीचे एक गुप्त ‘गुफा मार्ग’ (Tunnel) बना हुआ था।
हालांकि, इस गुफा मार्ग को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन खुदाई में मिल रही संरचनाओं ने इन चर्चाओं को फिर से जीवित कर दिया है।
📍 पर्यटन की नई संभावना
यदि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) इस घाट की पुष्टि करता है, तो बुधनी और नर्मदापुरम क्षेत्र में पर्यटन का एक नया केंद्र विकसित हो सकता है। यह घाट न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मध्यकालीन वास्तुकला का बेजोड़ नमूना भी हो सकता है।
📊 क्विक फैक्ट्स (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी |
| अनुमानित आयु | लगभग 600 वर्ष |
| ऐतिहासिक काल | मध्यकालीन (होशंग शाह शासनकाल) |
| खुदाई की गहराई | 15 से 20 फीट |
| मुख्य आकर्षण | प्राचीन पत्थर की सीढ़ियां और गुप्त गुफा की कहानी |
संपादकीय टिप्पणी: नर्मदा के किनारों पर दबी ऐसी विरासतें हमारी संस्कृति की अनमोल धरोहर हैं। उम्मीद है कि शासन स्तर पर इसकी उचित जांच और संरक्षण किया जाएगा।




