शाजापुर | मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में होली का एक ऐसा रूप देखने को मिलता है, जिसे देख दुनिया दंग रह जाए। पोलायकला तहसील के ग्राम पोलाय खुर्द में धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलने की परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है, जितनी सदियों पहले थी। यहाँ ग्रामीण आग से नहीं खेलते, बल्कि अपनी अटूट आस्था का परिचय देते हैं।
🔥 दहकते अंगारे, नंगे पैर और अटूट विश्वास
यह हैरतअंगेज अनुष्ठान गाँव के प्रसिद्ध गल महादेव मंदिर के प्रांगण में आयोजित होता है। होली की शाम जब पूरा देश रंगों में सराबोर होता है, तब पोलाय खुर्द के ग्रामीण एक कठिन परीक्षा की तैयारी करते हैं।
तैयारी: मंदिर परिसर में बड़ी मात्रा में लकड़ियाँ जलाकर दहकते हुए अंगारों का एक रास्ता तैयार किया जाता है।
अनुष्ठान: जलती हुई होली की लपटों के बीच से ग्रामीण पूरी श्रद्धा के साथ नंगे पैर गुजरते हैं।
चमत्कार या आस्था? सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन भीषण गर्म अंगारों पर चलने के बावजूद किसी भी ग्रामीण के पैरों में न तो छाले पड़ते हैं और न ही कोई जख्म होता है।
🏛️ सदियों पुरानी परंपरा: आज भी बरकरार
ग्रामीणों का मानना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है। गल महादेव के प्रति उनकी आस्था ही उन्हें इन अंगारों पर चलने की शक्ति देती है।
उत्साह का माहौल: इस आयोजन को देखने के लिए केवल गाँव ही नहीं, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
सामूहिक प्रार्थना: अंगारों पर चलने से पहले विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
सुरक्षा और आस्था: बिना किसी आधुनिक सुरक्षा उपकरण के, केवल ईश्वर के नाम के सहारे यह कठिन कार्य संपन्न किया जाता है।
📢 क्या कहते हैं ग्रामीण?
“यह हमारे महादेव की कृपा है। पीढ़ी दर पीढ़ी हम इस परंपरा को निभा रहे हैं। आग की तपन हमारी आस्था के सामने फीकी पड़ जाती है। आज तक किसी को भी अंगारों से चोट नहीं लगी है।”