खरगोन: आग का तांडव! मामा-भांजे की 7 एकड़ गेहूं की फसल खाक; दमकल की ‘देरी’ पर भड़के किसान

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खरगोन | शहर की सीमा से लगे ग्राम गोपालपुरा में बुधवार दोपहर प्रकृति और परिस्थिति ने किसानों पर दोहरा वार किया। अचानक खेत में लगी आग ने तेज हवाओं का साथ पाकर ऐसा विकराल रूप लिया कि देखते ही देखते सात एकड़ में खड़ी सुनहरी गेहूं की फसल राख के ढेर में बदल गई।

🔥 देखते ही देखते राख हुई साल भर की मेहनत

दोपहर का वक्त था जब गोपालपुरा के एक खेत से धुएं का गुबार उठा। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, तेज गर्म हवाओं ने आग की लपटों को आसपास के खेतों तक फैला दिया।

  • प्रभावित किसान: इस भीषण अग्निकांड में मामा और भांजे के दो अलग-अलग खेतों में खड़ी फसल जल गई।
  • ग्रामीणों का संघर्ष: गांव के युवाओं और खेत मालिकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी ऊंची थीं कि उनके पास जाना नामुमकिन था।
  • दमकल की कार्रवाई: सूचना के काफी देर बाद खरगोन से दमकल की गाड़ी पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।

📍 घटना के मुख्य बिंदु (Quick Facts):

विवरणजानकारी
स्थानग्राम गोपालपुरा (खरगोन सीमा)
कुल नुकसानकरीब 7 एकड़ गेहूं की फसल
आग का कारणअज्ञात (जांच जारी)
मुख्य चुनौतीतेज हवाएं और दमकल की देरी

⚠️ किसानों का आरोप: “समय पर आती दमकल तो बच जाती फसल”

पीड़ित किसानों और ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा आक्रोश है। किसानों का सीधा आरोप है कि:

  1. सूचना के बावजूद देरी: फायर ब्रिगेड को समय पर सूचना दी गई थी, लेकिन वाहन पहुंचने में काफी वक्त लग गया।
  2. भारी आर्थिक चोट: फसल कटाई के मुहाने पर थी, ऐसे में साल भर की कमाई और निवेश चंद मिनटों में बर्बाद हो गया।

📢 आगे क्या?

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पटवारी को भेजकर तत्काल नुकसान का सर्वे कराया जाए और पीड़ित मामा-भांजे को उचित मुआवजा (Compensation) प्रदान किया जाए।

अलर्ट: गर्मी के मौसम में खेतों में सूखी फसल और तेज हवाएं आग के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं। किसी भी चिंगारी को देखते ही तुरंत नजदीकी फायर स्टेशन और डायल 100 को सूचित करें।

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