इंदौर : विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के उपलक्ष्य में रविवार सुबह इंदौर की सड़कों पर एक खास नजारा देखने को मिला। इंदौर डिविजनल ऑप्थोलॉजिस्ट सोसायटी (IDOS) द्वारा आयोजित ‘ग्लूकोमा जागरूकता वॉक’ के जरिए शहरवासियों को आंखों की इस गंभीर बीमारी के प्रति सचेत किया गया।
📍 यशवंत क्लब से 56 दुकान तक गूंजा जागरूकता का संदेश
यह वॉक यशवंत क्लब से शुरू होकर शहर के मशहूर 56 दुकान क्षेत्र तक पहुंची। इस आयोजन में 100 से अधिक नेत्र चिकित्सक, पीजी छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने डॉक्टरों के इस प्रयास की सराहना की और समय पर नेत्र जांच को स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य बताया।
⚠️ क्यों कहा जाता है इसे “दृष्टि का साइलेंट चोर”?
IDOS के अध्यक्ष और विख्यात ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. अमित पोरवाल ने बीमारी की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा:
“ग्लूकोमा (काला मोतिया) दृष्टि का साइलेंट चोर है। यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी छीन लेता है। अगर 40 साल की उम्र के बाद नियमित जांच न कराई जाए, तो यह स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है।”
इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा:
विशेषज्ञों के अनुसार, निम्न श्रेणी के लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:
जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक है।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
जिनका चश्मे का नंबर बहुत अधिक है।
जिनके परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास रहा हो।
रंगों के साथ समापन और संकल्प
आयोजन की को-ऑर्डिनेटर डॉ. कविता पोरवाल और सचिव डॉ. सुमित अग्रवाल के नेतृत्व में रैली का सफल समापन हुआ। अंत में सभी प्रतिभागियों ने सुरक्षित हर्बल रंगों के साथ रंगोत्सव मनाया और संकल्प लिया कि वे समाज को नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते रहेंगे।
इस अवसर पर डॉ. राजेंद्र रघुवंशी, डॉ. यूएस तिवारी, डॉ. आदित्य अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक और रोटरी क्लब के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
डॉक्टरों की सलाह (Quick Tips):
साल में कम से कम एक बार आंखों की व्यापक जांच कराएं।
आंखों में दबाव महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।