केंद्रीय मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला: जल जीवन मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ी, 8.69 लाख करोड़ का प्रावधान

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drnewsindia.com/नई दिल्ली, 10 मार्च। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कैबिनेट ने Jal Jeevan Mission की अवधि को बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक करने की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही मिशन के पुनर्गठन और संरचनात्मक सुधारों के लिए कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय को भी स्वीकृति दी गई है।

सरकार ने इस योजना को केवल बुनियादी ढांचा निर्माण तक सीमित न रखकर अब इसे नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण मॉडल की ओर मोड़ने का निर्णय लिया है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल की नियमित और स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

बढ़ाया गया बजट, केंद्रीय सहायता भी बढ़ी

केंद्र सरकार के अनुसार जल जीवन मिशन के लिए कुल बजट को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। पहले वर्ष 2019-20 में इस योजना के लिए 2.08 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। नए निर्णय के तहत केंद्रीय हिस्से में 1.51 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि की गई है।

‘सुजलम भारत’ डिजिटल प्लेटफॉर्म बनेगा

मिशन के प्रभावी संचालन के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा “सुजलम भारत” तैयार किया जाएगा। इसके तहत देश के हर गांव को एक विशिष्ट “सुजल गांव / सेवा क्षेत्र आईडी” दी जाएगी। यह प्रणाली स्रोत से नल तक पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था का डिजिटल मैप तैयार करेगी, जिससे पारदर्शिता और निगरानी मजबूत होगी।

इसके साथ ही “जल अर्पण” कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पंचायतों और स्थानीय जल समितियों को योजनाओं के उद्घाटन और हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा।

ग्राम पंचायतों को मिलेगी अहम जिम्मेदारी

सरकार ने इस मिशन में ग्राम पंचायतों की भूमिका को मजबूत करने का फैसला किया है। जब राज्य सरकारें संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित कर देंगी, तब ग्राम पंचायत कार्यों के पूर्ण होने का प्रमाण पत्र जारी करेगी और अपने गांव को “हर घर जल” घोषित कर सकेगी।

सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए हर साल “जल उत्सव” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग जल स्रोतों के रखरखाव और समीक्षा में भाग लेंगे।

2019 से अब तक बड़ी उपलब्धि

सरकार के अनुसार वर्ष 2019 में देश के केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों (लगभग 17%) के पास ही नल-जल कनेक्शन उपलब्ध था। लेकिन जल जीवन मिशन के तहत अब तक 12.56 करोड़ से अधिक नए ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन दिया जा चुका है।

वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.80 करोड़ परिवारों (81.61%) तक नल से पानी पहुंच चुका है।

महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक लाभ

विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्टों में इस योजना के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं।

  • State Bank of India रिसर्च के अनुसार, इस मिशन से 9 करोड़ महिलाओं को पानी ढोने के काम से मुक्ति मिली है।
  • World Health Organization का अनुमान है कि इससे महिलाओं के श्रम में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत हुई है।
  • डायरिया से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सका है

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री Michael Kremer के अनुसार, स्वच्छ पानी की उपलब्धता से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% कमी आ सकती है, जिससे हर साल 1.36 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है।

रोजगार के अवसर भी बढ़े

अध्ययन के अनुसार इस मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 59.9 लाख प्रत्यक्ष और लगभग 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका को भी मजबूती मिलेगी।

2028 तक हर घर नल से जल का लक्ष्य

जेजेएम 2.0 का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किए जाएंगे, ताकि समय-सीमा के भीतर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार का मानना है कि यह मिशन केवल पेयजल आपूर्ति ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास को भी गति देगा। साथ ही यह पहल विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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