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सीहोर / सीहोर जिले में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति के नए नियमों ने आम आदमी के बजट को हिलाकर रख दिया है। गैस की किल्लत और महंगाई का सीधा असर अब शहर की गुमठियों और होटलों पर दिखने लगा है, जहाँ चाय से लेकर नाश्ते तक के दाम बढ़ गए हैं।
☕ आम आदमी पर मार: 5 रुपये वाली ‘कट चाय’ अब 7 रुपये की
गैस सिलेंडर के दामों में हुई वृद्धि का असर शहर की छोटी दुकानों और गुमठियों पर साफ देखा जा रहा है।
- दामों में बढ़ोतरी: शहर में मिलने वाली 5 रुपये की लोकप्रिय ‘कट चाय’ अब 7 रुपये की हो गई है।
- दुकानदारों का पक्ष: गुमठी संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस की बढ़ती लागत के कारण उनके पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। ग्राहकों को अब हर कप पर 2 रुपये अतिरिक्त चुकाने पड़ रहे हैं।
📋 नए नियम: 25 दिन के अंतराल पर ही होगी अगली बुकिंग
जिला आपूर्ति अधिकारी रेशमा भामोर ने बताया कि ऑयल कंपनियों ने गैस की कालाबाजारी रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं:
- रिफिल गैप: अब उपभोक्ता को पिछली डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगली गैस रिफिल की बुकिंग करने की पात्रता होगी।
- कालाबाजारी पर रोक: इस कदम से गैस सिलेंडरों की अफरातफरी और अवैध भंडारण पर लगाम कसी जा सकेगी।
- स्टॉक की स्थिति: हालांकि, प्रशासन का दावा है कि जिले में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
🚫 कमर्शियल सप्लाई पर ब्रेक: होटल और फैक्ट्रियों को झटका
खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कमर्शियल गैस की आपूर्ति को बेहद सीमित कर दिया गया है:
- किसे मिलेगी गैस: केवल चिकित्सालयों (अस्पतालों) और शैक्षणिक संस्थानों को ही कमर्शियल गैस की आपूर्ति जारी रहेगी।
- किसे नहीं मिलेगी: होटल, मॉल, औद्योगिक क्षेत्रों और बड़ी फैक्ट्रियों को फिलहाल कमर्शियल गैस नहीं दी जाएगी।
- विकल्प की सलाह: प्रशासन ने इन बड़े उपभोक्ताओं को वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।
🌍 क्यों गहराया संकट?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक (Geo-political) कारणों से एलपीजी के आयात में रुकावट आई है। इसी वजह से तेल कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि पहली प्राथमिकता केवल घरेलू उपभोक्ताओं (Household Consumers) को ही दी जाए।




